गूगल फेक प्ले स्टोर तक ले जानेवाले 27 एप्स को हटाया

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गूगल ने उन 27 एप्स को हटा दिया है, जो यूजर्स को नकली प्ले स्टोर डाउनलोड करने के लिए प्रेरित करते थे। इन दूर्भावनापूर्ण एप्स की पहचान पुणे स्थित क्विक हील टेक्नॉलजीज ने की थी और गूगल को इसकी जानकारी दी थी। क्विक हील सिक्युरिटी लैंब ने कहा कि इन एप्स को एडवेयर से डिवाइसों को प्रभावित करने के लिए बनाया गया था और यह यूजर्स को लगातार नकली ‘प्ले स्टोर’ डाउनलोड करने के लिए प्रेरित करता था।

ये एप्स यूजर्स को गेम खेलने के लिए गूगल प्ले स्टोर इंस्टाल करने को कहते थे। अगर कोई ऐसा नहीं करता था, तो यह लगातार इंस्टाल करने का पॉप अप दिखाते रहते थे।

अगर कोई नकली गूगल प्ले स्टोर इंस्टाल कर लेता था, तो यूजर्स को बार-बार फुल स्क्रीन विज्ञापन दिखते रहते थे। यह एप्प बैकग्राउंड में चलता रहता था और जब तक इसे मैनुअली अनइंस्टाल नहीं किया जाता था, यह जबरदस्ती विज्ञापन दिखाता रहता था।

क्विक हील ने कहा कि इन सभी एप्स को एक ही डेवलपर एएफएडी ड्रिफ्ट रेसर ने बनाया था और सभी एप्स कार रेसिंग गेम श्रेणी के थे।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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