असल प्रेम, चिंता, पुरस्कार माता-पिता की परवरिश में है : सोहा अली खान

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अभिनेत्री सोहा अली खान का कहना है कि मां बनने के बाद उनके भीतर स्वयं की मां के प्रति सम्मान और भी बढ़ गया। सोहा का मानना है कि माता-पिता की परवरिश में ही असली चिंता, पुरस्कार और प्रेम है।

विक्स के ‘टच ऑफ केयर’ अभियान की खास स्क्रीनिंग पर मीडिया के साथ बातचीत में सोहा ने अपने यह विचार साझा किए। उनके साथ इस मौके पर क्रिकेट खिलाड़ी गौतम गंभीर और श्रेया सरन भी मौजूद रहे।

सोहा ने कहा, “मैं हमेशा मां बनने के एहसास के बारे में सोचती थी। जब आप मां बनती हैं, तो आपके अंदर स्वयं की मां के प्रति सम्मान और बढ़ जाता है। पिछले सप्ताह पहली बार मैंने अपनी बेटी को अपने पति कुणाल खेमू के साथ छोड़ा था और दिन के अंत में उन्होंने मुझे फोन कर रहा कि वह मेरा बेहद सम्मान करते हैं, क्योंकि मैं हर दिन एक मां के रूप में परवरिश का काम करती हूं।”

इस दौरान सोहा ने इस बात का खुलासा भी किया कि वह अपने पति के साथ बच्चा गोद लेने के बारे में भी सोच रही थीं। हालांकि, अपनी एक मित्र के साथ बातचीत की।

सोहा ने कहा, “मेरी दोस्त ने कहा कि सवाल यह नहीं है कि आप मां बनने के लिए तैयार हैं कि नहीं। सवाल यह है कि क्या आप एक अभिभावक बनने के लिए तैयार हैं। असल प्रेम, चिंता, पुरस्कार माता-पिता की परवरिश में है।”

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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