एनबीएफसी के लिए सख्त हो सकते हैं आरबीआई के नियम

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वित्त मंत्रालय भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) को पेंशन और भविष्य निधि जैसी लोगों की जमाराशि में गैर-बैंकिंग वित्तीय संस्थाओं (एनबीएफसी) की पैठ के नियम सख्त बनाने को कह सकता है, क्योंकि यह वेतनभोगियों की बचत की राशि है, जिसे इन्फ्रास्ट्रक्चर एनबीएफसी जैसे जोखिमों से दूर रखा जाना चाहिए।

सूत्रों ने बताया कि आईएलएंडएफ की चूक और चूकों की बढ़ती संख्या के बाद नकदी के संकट से जूझ रही एनबीएफसी अलग से राहत पैकेज की मांग कर रही है, लेकिन इस संबंध में कोई भी फैसला लेने के लिए विस्तृत ब्योरे की आवश्यकता है।

वित्त मंत्रालय के अनुसार, हालांकि एनबीएफसी प्रमुख वित्त प्रदाता हैं, लेकिन वर्तमान में वे घाटे में हैं।

सूत्रों ने कहा, “उनके लिए धन का स्रोत बाजार है न कि लोग। उनकी नकदी की आवश्यकताओं के लिए विस्तृत विवरण की दरकार है और आरबीआई इसकी जांच करेगा।”

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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