रेमंड ने 200वां मिनी स्टोर खोला, अब 500 शहरों में मौजूदगी

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वस्त्र निर्माता और खुदरा विक्रेता रेमंड लिमिटेड ने सोमवार को बेंगलुरू के होस्कोट में अपने ऐतिहासिक 200वें ‘मिनी’ टीआरएस (द रेमंड शॉप) की घोषणा की है। इसके साथ ही रेमंड की मौजूदगी 500 शहरों में हो गई है। कंपनी ने एक बयान में कहा कि छोटे शहरों एवं कस्बों में बढ़ती आकांक्षाओं और व्यय शक्ति को देखते हुए रेमंड देश के हर नुक्कड़ और कोने में अपनी उपस्थिति महसूस करने के लिए दुकानों के चुस्त प्रारूप में प्रवेश किया है।

रेमंड के सीईओ संजय बहल ने कहा, “बिहार में मार्च 2017 में एक मिनी टीआरएस के साथ शुरू हुआ सफर आज 200 स्टोर्स के मील के पत्थर तक पहुंच गया है। हम मानते हैं कि कस्टम सिलाई और फैशन सलाहकार सेवा के साथ कपड़े और परिधान के लिए अनुभवी खरीदारी हमेशा सराही जाएगी। विस्तृत उत्पाद पोर्टफोलियो के साथ, गुणवत्ता और रेमंड के खुदरा बिक्री पर निरंतर ध्यान केंद्रित करते हुए, इन छोटे लेकिन स्मार्ट स्टोर प्रारूपों में ग्राहकों को एक अलग अनुभव मिलेगा।”

रेमंड लिमिटेड के निदेशक-रिटेल मोहित धंजल कहते हैं, “इस नए बिजनेस मॉडल के साथ हमने पिछले 80 हफ्तों में 200 स्टोर्स लॉन्च किए हैं। पुरुषों की फैशन और लाइफस्टाइल श्रेणी में सबसे तेज खुदरा स्टोर रोलआउट। अनुकूलित प्रारूप टीआरएस में एक एकीकृत डिजिटल ओमनी-चैनल क्षमता भी है, जिसके माध्यम से ग्राहक ऑनलाइन स्टोर तक पहुंच सकते हैं।”

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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