प्रभाव निवेश’ बुनियादी जरूरतें पूरी करने में मददगार : रतन टाटा

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टाटा ट्रस्ट के अध्यक्ष रतन टाटा ने कहा है कि ग्लोबल स्टीयरिंग ग्रुप (जीएसजी) के प्रभाव निवेश से उन विकासशील देशों की जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी जिन्हें बुनियादी ढांचा, संपर्क, शिक्षा और चिकित्सा जैसी जरूरी सुविधाओं के लिए निवेश की आवश्यकता है। हाल ही में नई दिल्ली में संपन्न हुए जीएसजी के चौथे वार्षिक शिखर सम्मेलन में रतन टाटा ने कहा, “भारत सहित विकासशील देशों की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए विभिन्न क्षेत्रों में ग्लोबल जीएसजी द्वारा नियोजित प्रभाव निवेश का दूरगामी प्रभाव पड़ेगा।”

उन्होंने कहा, “इस तरह का निगरानीयुक्त निवेश नए भारत का आवश्यक अंग होगा जिसका निर्माण करने की दिशा में हमारे प्रधानमंत्री प्रयासरत हैं।”

जीएसजी के इस सम्मेलन में 50 से अधिक देशों के सैंकड़ों इम्पेक्ट लीडर्स ने हिस्सा लिया।

जीएसजी के संस्थापक व अध्यक्ष सर रोनाल्ड कोहेन ने कहा, “जब हम निवेश करने के तरीके की बात करते हैं, तो वित्तीय जोखिम और रिटर्न के बारे में सोचते हैं। इसका तीसरा पहलू है प्रभाव, जो समाज और पर्यावरण के लिए सकारात्मक परिणामों का आकलन करता है।”

उन्होंने कहा, इस नए वित्तीय मॉडल के अंतर्गत, सामाजिक प्रभाव कम्पनी की बॉटमलाइन के रूप में महत्वपूर्ण है।”

उन्होंने बताया कि सम्मेलन में 53 देशों के 700 से अधिक इम्पेक्ट लीडर्स एकत्र हुए और उन्होंने प्रभाव क्रांति की उन्नति को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।

उन्होंने कहा कि 2020 तक प्रभाव निवेश बाजार को 150 अरब डॉलर से 300 अरब डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य है, जिससे एक अरब लोगों को फायदा होगा।

नोबल पुरस्कार विजेता और अमेरिका के पूर्व उपराष्ट्रपति अल गोर ने कहा कि अधिक मात्रा में पूंजी की आवश्यकता का अर्थ है कि प्रभाव वित्तीय समाधान का एक महत्वूपर्ण अंग है।

इस सम्मेलन में भारत में प्रभाव पूंजी व विकास के लिए एक-एक अरब डॉलर के दो होलसेल फंड की शुरुआत की गई, जिनमें इंडिया इम्पेक्ट फंड ऑफ फंड्स (आईआईएफएफ) और इंडिया एजुकेशन आऊटकम फंड (आईईओएफ) शामिल हैं।

जीएसजी के सीईओ अमित भाटिया ने कहा, “भारत में आने वाला अधिकांश निवेष इक्विटी के रूप में है और ऋण बहुत कम है। हमने सोचा कि यदि हमें इंडिया इम्पेक्ट निवेश ईकोसिस्टम को वास्तव में बेहतर बनाना है तो हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि सभी स्तरों, वेंचर डेब्ट से ले कर ग्रोथ डेब्ट तक एक दीर्घकालिक वहनीय ऋण होना चाहिए जो अर्थव्यवस्था को और आगे बढ़ा सके।”

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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