Rape:देश में बढ़ते रेप के मामलें, सामाजिक बदलाव करना ही एक मात्र उपाय

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जयपुर।रेप कहूं या बलात्कार क्या कहूं और क्यों कहूं, यह शब्द बोलते ही शरीर में मानो करंट सा उठ ता हो,और ये शब्द बना ही क्यों ।आज भी बहुत सी जगह लड़कियों को कुछ नहीं समझा जाता बस वो १८ की हुई नहीं की उनकी शादी करवा दी जाती है,क्यों उन्हें कोई हक नहीं जिंदगी जीने का या पढ़ने का और बहुत सी जगह लड़कियों के जन्म से ही लोगो को अजीब लगता है क्यों क्योंकि लड़किया उनका वंश केसे बढ़ाएंगी।

रेप की खबर सुनते ही गुस्सा सा आता है आखिर लड़की ही क्यों,क्या सूजती है उस इंसान को जो ये करता है और जो हमारे यहां इतनी गंदी हरकत करता है उसे सजा क्यों सालों बाद दी जाती है ,उसी समय क्यों नहीं दी जाती है।भगवान ने पुरुष और इस्त्री का शरीर अलग इसीलिए बनाया है ताकि ये दुनिया आगे बढ़ सके ना कि इसीलिए की कुछ लोग लड़कियों का फायदा उठा सके।

घर से बाहर निकले तो छिछोरे लड़के नहीं छोड़ते,लड़कियों का रात में क्या वैसे भी बाहर निकल ना मुश्किल हो जाता है,क्योंकि डर बैठ जाता है।जैसे लड़के घूमते है वैसे लड़किया फ्रीली घूम ही नहीं पाती है।रेप के मामले दिन प्रति​ दिन बढते जा रहे है क्यों इन सब चीजों का कुछ नहीं हो रहा और कब तक चलेगा ये कब वो दिन आएगा की लड़किया बिना टेंशन के घर से बाहर निकल सकेंगी।

हम लोगो की सामाजिक सोच ऐसी है कि हम लोग अपने आप को इन चीजों में कम इन्वॉल्व करते है।इसलिए लोगो की सोच को बदलने के लिए लड़कियों को लेकर सामाजिक सोच को बदलना आवश्यक है। अगर कोई नीच हरकत करता है ,उसे यह करने की हिम्मत ना हो और तो और वो लड़कियों को उस नजर से देखे भी ना और जो लोग ये करते उन्हें तुरंत की तुरंत सजा देनी चाहिए। हमारे घर में जितनी भी लड़किया है उन्हें सिखाना है की डरों मत ,उन चीज़ों से लड़े, ऐसा हमे उनको सिखाना है,ताकि कोई भी लड़कियों का फायदा ना उठा सके।

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