Ranchi : दिल्ली भेजी जा रहीं छह नाबालिक लड़कियों का रेस्क्यू

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रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स (आरपीएफ) के ‘नन्हें फरिश्ते’ टीम ने सोमवार को राजधानी एक्सप्रेस से दिल्ली भेजी जा रहीं छह नाबालिक लड़कियों का रेस्क्यू किया है। पुलिस ने यह जानकरी दी। आरपीएफ ने दरअसल घरेलू कामों के लिए राज्य के बाहर भेजी जा रहीं लड़कियों को बचाने के लिए एक टीम नन्हें फरिश्ते का गठन किया था। सभी बचाई गईं लड़कियां नाबालिक हैं और इन्हें चाइल्डलाइन रांची को सौंप दिया गया। जांच के बाद उन्हें या तो उनके घर भेज दिया जाएगा या फिर सरकारी संस्थान भेजा जाएगा।

रांची अरपीएफ के इन-चार्ज अमिताभ आनंद बर्धन ने कहा, “नन्हें फरिश्ते टीम एक तलाशी अभियान चला रही थी। छह नाबालिक लड़कियों को राजधानी एक्सप्रेस का वेट करते समय देखा गया। पूछताछ से पता चला कि इनके साथ इनके अभिभावक नहीं है। इन्हें घरेलू कामों के लिए नई दिल्ली भेजा जा रहा था। लड़कियों को भी यह नहीं पता था कि नई दिल्ली में उन्हें कहां जाना है। बचाई गई लड़कियों में, चार खूंटी जिले और एक सिमडेगा व एक गुमला जिले की हैं।”

आरपीएफ हालांकि अभी तक मानव तस्करी में संलिप्त लोगों का पता नहीं लगा पाई है। बताया गया है कि एक सिंडिकेट इन लड़कियों को घरेलू कामों के लिए राज्य से बाहर भेजने का काम करता है।

रांची आरपीएफ के अनुसार, 15 अगस्त को नन्हें फरिश्ते के गठन के बाद से अब तक 31 बच्चों का रेस्क्यू किया गया है और 10 मानव तस्करों को गिरफ्तार किया गया है।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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