तेलुगू फिल्म इंडस्ट्री में Rakul Preet के हुए 7 साल पूरे

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अभिनेत्री रकुल प्रीत रविवार को तेलुगू फिल्म इंडस्ट्री में 7 साल पूरे होने का जश्न मना रही हैं। रकुल ने अपने सत्यापित इंस्टाग्राम अकाउंट पर 7 साल पहले और अब की तस्वीर शेयर की।

उन्होंने इसे कैप्शन देते हुए लिखा, “हैशटैग टीएफआई के 7 साल। मैं तब भी मुस्कुरा रही थी और अब भी मुस्कुरा रही हूं। इसका कारण सभी लोग हैं, जिन्होंने मुझे बेहद प्यार से स्वीकारा। एक दिल्ली के लड़की होने से लेकर एक पक्का तेलुगू अमेयी तक, यह यात्रा बेहद खुबसूरत रहा। प्रत्येक निर्देशक, निर्माता, को-स्टार, सहकर्मी, दोस्त और प्रशंसक को धन्यवाद, जिन्होंने मुझ पर विश्वास किया और मेरे साथ खड़े रहे, मेरी सराहना की, मेरी आलोचना भी की, ताकि मैं दिन प्रतिदिन बेहतर बनूं। मेरे परिवार, मैनेजर और टीम के बिना कुछ भी संभव नहीं था।”

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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