राजनाथ सिंह ने थल सेना भवन की आधारशिला रखी

0

केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार को दिल्ली छावनी में थल सेना भवन की आधारशिला रखी। थल सेना भवन दिल्ली भर में फैले विभिन्न सेना मुख्यालयों को एक छत के नीचे लाएगा। वर्तमान में भारतीय सेना, राजधानी में आठ विभिन्न जगहों से कार्य करती है।

समारोह में मौजूद अधिकारियों और सैनिकों को संबोधन में मंत्री ने कहा, “आप जैसे बहादुर सैनिकों ने भारत की एक शक्ति के रूप में पहचान को सुनिश्चित किया है। इसका श्रेय बहादुर सैनिकों को जाता है।”

उन्होंने कहा कि कई सालों से सेना भवन की जरूरत महसूस की जा रही है।

उन्होंने कहा, “आठ जगहों से कार्यालय चलाए जा रहे हैं। अब यह एक जगह से कार्य कर सकेंगे।”

मुख्यालय परिसर में कार्यालय की जगह और आवासीय सुविधा होगी और इसके अगले पांच सालों में निर्माण की उम्मीद है।

भारतीय सेना ने कहा, “कुल 6,014 कार्यालयों का निर्माण किया जाएगा जिसमें 1684 सैन्य व सिविलियन अफसर काम करेंगे।”

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

SHARE
Previous articleजैविक खाद्य महोत्सव में जुटी 180 महिला उद्यमी
Next articleयुवाओं के लिए जागरूकता कार्यक्रम में उद्यमिता अपनाने की सलाह
बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here