राजीव बजाज बोले राहुल से, बंद ने कोरोना को नहीं, बजाडीडीपी कर्व को सपाट किया

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उद्यमी राजीव बजाज ने कहा है कि कोविड-19 महामारी के प्रसार को रोकने के लिए लागू किए गए राष्ट्रव्यापी बंद ने अर्थव्यवस्था को तबाह कर दिया है। इससे कोविड-19 की बजाय जीडीपी कर्व (वक्ररेखा) ही सपाट हो गया है। बजाज ऑटो के प्रबंध निदेशक राजीव बजाज ने गुरुवार को पूर्व कांग्रेस प्रमुख राहुल गांधी के साथ एक संवाद के दौरान यह बात कही। यह राहुल गांधी की चौथी बातचीत है, जो व्यापार जगत के उन लोगों के साथ है, जो नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार की तीखी आलोचना कर रहे हैं।

राष्ट्रव्यापी बंद के अर्थव्यवस्था एवं संक्रमण पर पड़े प्रभाव और इसके खुलने पर पड़ने वाले प्रभावों के बारे में बोलते हुए उद्योगपति राजीव बजाज ने जापान और स्वीडन का जिक्र किया, जिन्होंने अपना व्यवसाय बंद नहीं किया, लेकिन क्लस्टर नियंत्रण पद्धति का प्रचार करने की कोशिश की। इस प्रणाली में सामाजिक दूरी को प्रोत्साहित किया गया, लेकिन दुकानें और रेस्तरां खुले रहे। कुछ छात्रों ने स्कूल जाना जारी रखा और यूरोपीय आगंतुकों के लिए सीमाएं खुली रहीं। इसने अर्थव्यवस्था को कई अन्य राष्ट्रों के विपरीत, पहली तिमाही में विकसित करने में मदद की।

गांधी ने इस संवाद के दौरान कहा कि कोरोना संकट से निपटने के लिए शुरुआत में राज्यों के मुख्यमंत्रियों एवं जिला अधिकारियों को शक्ति देने की जरूरत थी और केंद्र सहयोग का काम करता।

उन्होंने यह भी कहा कि इस मुश्किल समय में मजदूरों, गरीबों, श्रमिकों, एमएसएमई और बड़े उद्योगों को भी मदद की जरूरत है।

राहुल के राष्ट्रव्यापी बंद से जुड़े सवाल पर बजाज ने कहा, “मैं यह नहीं समझ पाता कि एशियाई देश होने के बावजूद हमने पूर्व की तरफ ध्यान कैसे नहीं दिया। हमने इटली, फ्रांस, स्पेन, ब्रिटेन और अमेरिका को देखा।”

बजाज के मुताबिक, हमने एक कठिन बंद को लागू करने की कोशिश की जिसमें कमियां थीं। उन्होंने कहा, “कठोर और खामियों वाला लॉकडाउन यह सुनिश्चित करता है कि वायरस अभी भी मौजूद रहेगा। यानी आपने वायरस की समस्या को हल नहीं किया, लेकिन निश्चित रूप से अर्थव्यवस्था को नष्ट कर दिया। संक्रमण को समतल करने के बजाय जीडीपी के कर्व को सपाट कर दिया।”

गौरतलब है कि राहुल गांधी कोरोना संकट के बीच लगातार आर्थिक विशेषज्ञों से बात कर रहे हैं। राहुल ने अपने इस सिलसिले की शुरुआत भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन से की थी, जिसके बाद उन्होंने नोबेल विजेता अभिजीत बनर्जी से भी चर्चा की। इसके अलावा राहुल गांधी हार्वर्ड ग्लोबल हेल्थ इंस्टीट्यूट के प्रोफेसर आशीष झा और स्वीडिश महामारी विशेषज्ञ जोहान गिसेके से लेकर प्रवासी मजदूरों से भी चर्चा कर चुके हैं।

नयू स्त्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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