मृत्यु की स्थिति में राजस्थान सरकार कोरोना योद्धाओं को देगी 50 लाख रुपये

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राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राज्य में कोरोनावायरस अभियान के दौरान कोरोनोवायरस के कारण किसी भी सरकारी कर्मचारी के मृत्यु पर उसके परिवार को 50 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। केंद्र सरकार ने पहले मेडिकल स्टाफ सहित कोरोना योद्धाओं को 50 लाख रुपये के चिकित्सा बीमा कवर देने की घोषणा की थी, हालांकि, अब, राज्य सरकार ने इसे अन्य कर्मचारियों के लिए भी बढ़ाया है जो कोरोनावायरस ऑपरेशन का हिस्सा हैं।

राज्य सरकार ने कहा कि अनुबंध के आधार पर काम करने वाले कर्मचारियों को भी इस वित्तीय सहायता योजना के तहत लाभ दिया जाएगा।

पटवारियों, ग्राम सेवकों, कांस्टेबलों, सफाई कर्मचारियों सहित संविदा कर्मचारियों, स्वास्थ्य कर्मचारियों और होमगार्ड, नागरिक सुरक्षा, आशा और आंगनवाड़ी कार्यकतार्ओं की तरह मानदेय पर कार्यरत लोगों को भी लाभार्थियों में शामिल किया गया है।

न्यूज स्त्रेात आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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