राजस्थान कांग्रेस ने 2 विधायकों का निलंबन रद्द किया

0

राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार के खिलाफ बागी तेवर दिखाने वाले पूर्व पर्यटन मंत्री विश्वेंद्र सिंह और विधायक भंवरलाल शर्मा के निलंबन को कांग्रेस पार्टी ने वापस ले लिया है। एआईसीसी के महासचिव अविनाश पांडे ने एक ट्वीट में कहा, “एक विचार विमर्श के बाद राजस्थान कांग्रेस के विधायक भंवरलाल शर्मा जी और विश्वेंद्र सिंह जी का निलंबन रद्द कर दिया गया है।”

बता दें कि कांग्रेस पार्टी द्वारा राजस्थान में गहलोत सरकार को गिराने की साजिश करने का आरोप लगने के बाद दो विधायकों को कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से हटा दिया गया था। पार्टी ने लीक हुए ऑडियो टेप का उल्लेख करते हुए कहा कि टोंक विधायक सचिन पायलट के साथ दो विधायकों ने भाजपा के साथ मिलकर एक षड्यंत्र रचा।

राज्य विधानसभा का महत्वपूर्ण सत्र शुक्रवार से शुरू हो रहा है और दोनों विधायकों को सत्र में भाग लेने के लिए पार्टी द्वारा आमंत्रित किया गया है।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

SHARE
Previous articleउत्तर प्रदेश : विधायक विजय मिश्रा ने बताया जान को खतरा, पुलिस ने नकारा
Next articleकोरोना का आरटीआई मामलों की निपटान दर पर असर नहीं पड़ा : जितेंद्र सिंह
बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here