राजस्थान भ्रमित कांग्रेस पर विश्वास नहीं कर सकती : मोदी

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राजस्थान में अपने चुनावी अभियान को समाप्त करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को कहा कि राज्य में मतदाता कांग्रेस पर विश्वास नहीं कर सकते जोकि एक ‘भ्रमित’ पार्टी है जिसका ‘न तो कोई मजबूत नेतृत्व है और जिसके पास ना ही कोई नीति’ है। यहां जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने अपनी चार पीढ़ियों के कार्यकाल में जनजातियों के बारे में नहीं सोचा, क्योंकि पार्टी ‘परिवार से परे’ कुछ नहीं देख सकती।

मोदी ने कहा, “एक मजबूत नेतृत्व को कम से कम एक छोटे नगरपालिका को चलाने की जरूरत होती है। कांग्रेस के पास न तो मजबूत नेतृत्व है और न ही नीयत है। क्या हम अपनी राजस्थान सरकार को ऐसी भ्रमित पार्टी को सौंप सकते हैं?”

उन्होंने कहा कि मजबूत नेतृत्व का मतलब होता है, ‘जिसके पास अनुभव हो, जिसकी सोच स्पष्ट हो, जो संवेदनशील हो और लोगों के हित में मजबूत फैसले ले सके।’

मोदी ने कहा कि जनजातीय मामलों के लिए एक अलग से मंत्रालय का गठन अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के कार्यकाल में किया गया।

उन्होंने कहा, “कांग्रेस में परिवार के बाहर कुछ है क्या? उनके लिए उनका परिवार ही सबकुछ है, मेरे लिए 125 करोड़ भारतीय मेरे परिवार हैं।”

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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