रेलवे ने हिंदी में बात के लिए ऑनलाइन चैटबॉट को किया उन्नत

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कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित ‘आस्कदिशा’ चैटबॉट को आईआरसीटीसी द्वारा दी जाने वाली विभिन्न सेवाओं के संबंध में इंटरनेट पर प्राप्त रेल यात्रियों की समस्याओं का समाधान करने के लिए विकसित किया गया है। रेल यात्रियों को पेश की गई विभिन्न सेवाओं के संबंध में इंटरनेट पर रेल यात्रियों की समस्याओं के समाधान के लिए भारतीय रेलवे ने अक्टूबर 2018 में कृत्रिम बुद्धिमता (आर्टफिशयल इन्टेलिजेन्स) आधारित आस्कदिशा चैटबॉट की सेवाएं शुरू की।

आस्कदिशा चैटबोट को प्रारम्भ में अंग्रेजी भाषा में शुरू किया गया था लेकिन ग्राहक सेवाओं को बढ़ाने और चैटबॉट की सेवाओं को और मजबूत बनाने के लिए आईआरसीटीसी ने अब ग्राहकों के साथ हिंदी भाषा में बातचीत करने के लिए आस्कदिशा का उन्नयन किया है।

आस्कदिशा पर हिंदी भाषा में दैनिक आधार पर औसतन 3000 पूछताछ की जा रही हैं और यह संख्या दिन प्रति-दिन बढ़ रही है जो ग्राहकों में इसकी स्वीकार्यता को दर्शाती है। आईआरसीटीसी की निकट भविष्य में कई अन्य अतिरिक्त सुविधाओं के साथ अधिक से अधिक भाषाओं में इसकी शुरुआत करने की योजना है। शुरुआत से लेकर अब तक आस्कदिशा का 15 करोड़ से अधिक यात्रियों ने लाभ उठाया है।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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