रेलवे 20 हजार कोचों को आइसोलेशन वार्ड में तब्दील करेगा

0

भारतीय रेलवे ने मंगलवार को कहा कि रेलवे अपने 20,000 पैंसेजर ट्रेन कोचों को क्वारंटाइन केंद्रों में तब्दील करेगा, ताकि बुरी स्थिति में 3.2 लाख से ज्यादा बेडों की व्यवस्था की जा सके। नेशनल ट्रांस्पोर्टर ने कहा, “भारतीय रेलवे द्वारा निर्णय लिया गया है कि देश में क्वारंटाइन सुविधाओं को बढ़ाने के लिए 20,000 कोचों को क्वारंटाइन या आइसोलेशन कोच में बदला जाएगा।”

मंत्रालय ने कहा कि कोच को आइसोलेशन वार्ड में तब्दील करने के लिए सशस्त्र बल मेडिकल सेवा, कई जोन के मेडिकल विभाग, आयुष्मान भारत, स्वास्थ्य मंत्रालय से परामर्श लिया गया।

मंत्रालय के बयान के अनुसार, “इन मोडिफाइड 20,000 कोचों में 3.2 लाख संभावित बेड की व्यवस्था की जा सकती है।”

बयान के अनुसार, 5000 कोचों को आइसोलेशन वार्ड में तब्दील करने का काम पहले ही शुरू किया जा चुका है।

बयान के अनुसार, इन 5000 कोचों में 80,000 बेडों तक की क्षमता है और एक कोच में आइसोलेशन के लिए 16 बेड है।

न्यूज स्त्राते आईएएनएस

SHARE
Previous articleबिहार : मस्जिद में जांच करने गई पुलिस टीम पर हमला
Next article20 साल बाद में खुला कॉमेड़ी फिल्म ‘हेरा फैरी’ का राज – देखिए पूरी खबर
बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here