रेलवे ने यात्रियों को लौटाए 1885 करोड़ रुपये

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कोरोना वायरस महामारी के दौरान कैंसिल किए गए टिकटों के एवज में उत्तर रेलवे ने यात्रियों को 1885 करोड़ रुपये लौटा दिया है। इन ट्रेनों को भारतीय रेल ने देश भर में कोरोना वायरस महामारी के फैलाव को रोकने के लिए रद्द की थी। उत्तर रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी दीपक कुमार ने बताया कि इन टिकटों की बुकिंग 21 मार्च से 31 मई के बीच ऑनलाइन की गयी थी। इस दौरान यात्रियों को पृरी रकम लौटायी गयी है। उन्होंने यह भी बताया कि रेलवे ने यह रकम उन एकाउंट्स में लौटा दिया है , जिस एकाउंट्स के जरिये टिकट खरीदे गए थे। इसके साथ ही रेलवे ने यह भी दावा किया है कि सभी रकम को तय समय सीमा के भीतर लौटाया गया है।

गौरतलब है कि रेलवे ने देश भर में कोरोना वायरस महामारी को देखते हुए यात्री ट्रेनों का परिचालन रद्द कर दिया था। इस दौरान भारी संख्या में ट्रेनों को रद्द किया गया, जिसकी वजह से रेलवे को यात्रियों को उनके रकम वापस लौटाने में युद्धस्तर पर काम करना पड़ा।

न्ूय स्त्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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