रेलवे ने कर दिया घायल लोगों के आधार नंबर को सार्वजनिक, हो सकता है बवाल

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जयपुर। आधार कार्ड की निजता की निजता के मामले में केंद्र सरकार विपक्षी दलों से गंभीर आरोपों का सामना कर रही है। लोगों के बीच भी ये एक अजीब सा माहौल है कि क्या सरकार सच में आधार कार्ड के द्वारा निजी जानकारियां इकट्ठा कर रही है। आधार कार्ड से निजता के सवाल का जवाब अभी सुप्रीम कोर्ट भी देने वाली है। सुप्रीम कोर्ट में निजता के सवाल पर अभी सुनवाई चल रही है। लेकिन अगर खुद सरकार का मंत्रालय ही आधार कार्ड का नंबर सार्वजनिक कर दे तो वापस से आधार कार्ड की सुरक्षा पर सवाल उठने लगते हैं।

 

29 सितम्बर 2017 को मुंबई में एलफिंस्टन रोड और परेल उपनगरीय रेलवे स्टेशनों को जोड़ने वाला फुटओवर ब्रिज अचानक से भीड़ बढ़ जाने की वजह से नीचे गिर गया था। इस हादसे में 22 लोगों का मौत हो गई थी और 30 से ज़्यादा लोग घायल हो गए थे।

एक आरटीआई ने सवाल करके रेल मंत्रालय से इस हादसे में घायल हुए लोगों को मिले मुआवज़े के सबूत मांगे थे। रेलवे ने सबूत तो दिया लेकिन साथ ही में आधार नंबर, मोबाइल नंबर और घायलों के घर का पता भी सार्वजनिक कर दिया। इस तरह से सरकार ने खुद ही लोगों के आधार नंबर को सार्वजनिक करके अपने ही कथन को गलत साबित कर दिया है।

सुप्रीम कोर्ट में सरकार हमेशा से ये बात कहती हुई आई है कि आधार कार्ड से जुड़ी जानकारियां बेहद संवेदनशील होती है। सरकार ने खुद ही जनता को कहा है कि अपना आधार कार्ड जहां ज़रुरी है, वहीं किसी को दें, नहीं तो ना दें। यूनिक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया (यूआईडीएआई) के सीईओ ने एक बार खुद ही ट्वीट करेक सरकार को कहा था कि सरकार अगर जनता का आधार कार्ड से जुड़ी जानकारियां अपने पास रखती है तो उसे वो कभी सार्वजनिक ना करे।

 

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