रेल दुर्घटनाओं में हताहतों की दर 84 फीसदी घटी : रेलवे

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रेल मंत्री पीयूष गोयल जहां राष्ट्रीय परिवहन में सुरक्षा और अवसंरचना में सुधार पर जोर दे रहे हैं, वहीं भारत में रेल दुर्घटना में मारे जाने वालों और घायल होने वालों की संख्या में 84 फीसदी गिरावट दर्ज की गई है। रेलवे के एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह जानकारी दी।

अधिकारी ने आईएएनएस को बताया, “पिछले 12 महीनों में (2017 के अक्टूबर से 2018 के सितंबर तक) दुर्घटना से होनेवाली मौतें घटकर 40 रही हैं। जबकि 2016 के अक्टूबर से 2017 के सितंबर की अवधि में रेल दुर्घटना में 244 लोग मारे गए थे।”

उन्होंने कहा, “यह 84 फीसदी की गिरावट है।”

अधिकारी ने बताया कि दुर्घटनाओं में घायल होनेवालों में आश्चर्यजनक रूप से कमी आई है।

उन्होंने कहा, “पिछले 12 महीनों में (2017 के अक्टूबर से 2018 के सितंबर तक) दुर्घटना में घायल होनेवालों की संख्या घटकर केवल 56 रही है। जबकि 2016 के अक्टूबर से 2017 के सितंबर की अवधि में रेल दुर्घटना में 491 लोग घायल हुए थे।”

अधिकारी ने बताया कि पिछले 12 महीनों में रेलवे ने कुल 2,257 किलोमीटर रेल पटरियों का नवीनीकरण किया है।

उन्होंने कहा कि नवीनीकरण की दर में 55 फीसदी की तेजी आई है।

अधिकारी ने बताया कि इसके साथ ही रेलवे का पंक्चुअली स्कोर भी बढ़ा है, जो अप्रैल में 62 फीसदी था, सितंबर में बढ़कर 74 फीसदी हो गया है।

अधिकारी ने बताया कि रेल पटरियों के नवीनीकरण के अलावा रेलवे ने यूएसएफडी (व्हिकुलर अल्ट्रासोनिक फ्लो डिटेक्शन) प्रणाली लगा रही है, जो पटरियों की गड़बड़ियों को तेजी से बता सकती है और मैनुअल प्रणाली की तुलना में शुरुआत में ही पता लगा सकती है।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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