महेंद्रगढ़ रैली को सोनिया की जगह अब राहुल करेंगे संबोधित

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कांग्रेस की अंतरिम कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी शुक्रवार को हरियाणा के महेंद्रगढ़ में चुनावी रैली को संबोधित नहीं करेंगी और अब उनकी जगह उनके बेटे व कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी रैली को संबोधित करेंगे। सोनिया गांधी ने 2019 के लोकसभा चुनाव में अपने खराब स्वास्थ्य के कारण प्रचार नहीं किया था। अंतरिम कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में लौटने के बाद यह उनकी पहली रैली थी। पार्टी ने एक विस्तृत कार्यक्रम भी जारी किया था, जिसमें कहा गया था कि वह शुक्रवार को महेंद्रगढ़ में गवर्नमेंट कॉलेज खेल परिसर में एक जनसभा को संबोधित करेंगी।

पार्टी के एक सूत्र ने कहा कि सोनिया अपनी खराब सेहत के कारण रैली में शामिल नहीं हो पाएंगी। पार्टी ने कहा, “राहुल गांधी दोपहर 2 बजे महेंद्रगढ़ में जनसभा को संबोधित करेंगे।” गौरतलब है कि हरियाणा और महाराष्ट्र में 21 अक्टूबर को विधानसभा चुनाव के लिए मतदान होना है, जिसके लिए सभी पार्टियां जोर-शोर से चुनाव प्रचार में जुटी हुई हैं।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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