राहुल ने पीएम केयर्स से खरीदे गए वेंटिलेटर्स के परफॉर्मेस पर सवाल उठाए

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कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने रविवार को केंद्र सरकार पर कोरोनावायरस से लड़ने के लिए दोयम दर्जे के वेंटिलेटर्स खरीद कर लोगों की जिंदगी को खतरे में डालने का आरोप लगाया। राहुल ने एक आलेख को सदर्भित करते हुए ट्वीट कर कहा, “पीएम केयर्स की अपारदर्शिता : 1. भारतीय जीवन को खतरे में डालना। 2. लोगों के पैसे का इस्तेमाल दोयम दर्जे के उत्पाद खरीदने में करना।”

उन्होंने यहां तक कि एक हैशटैग ‘बीजेपी फेल्स कोरोना फाइट’ का भी इस्तेमाल किया है।

न्यज आर्टिकल में एक पूर्व कर्मचारी का उद्धरण देते आरोप लगाया गया है कि पीएम केयर्स के वेंटिलेटर मेकर एजीवीए ने ‘खराब परफॉर्मेस’ को छुपाने के लिए सॉफ्टवेयर में हेराफेरी की है।

इससे पहले रविवार को कांग्रेस प्रवक्ता गौरव वल्लभ ने भाजपा से पूछा, “कई सरकारी अस्पतालों के डॉक्टरों के विशेषज्ञ पैनल ने बताया कि एजीवीए हेल्थ केयर द्वारा आपूर्ति किए गए वेंटिलेटर्स दोयम दर्जे के हैं। सरकार क्यों संकट की इस घड़ी में दोयम दर्जे के उपकरण के साथ लाखों रोगियों के जीवन के साथ खिलवाड़ कर रही है।”

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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