राहुल गांधी ने पर्यावरण दिवस पर संत कबीर के दोहे साझा किए

0

वन्यजीव संरक्षण पर जोर देते हुए कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर और संत कबीर की जयंती पर उनके दोहे साझा किए। दोहे में उन्होंने काम को कल पर टालने की बजाय अभी करने की बात कही है। राहुल ने ट्वीट किया, “कल करे सो आज कर, आज करे सो अब, पल में परलय होएगी, बहुरी करोगे कब।”

कबीर एक बौद्धिक संत थे, जिन्होंने अपनी सीख के माध्यम से भारत में सुधार करने का प्रयास किया। ये सीख उनके भक्ति आंदोलन के ज्ञान का आधार थीं, जिसे आधिकारिक रूप से कबीर पंथ कहा जाता था।

राहुल गांधी ने केरल के वायनाड में मुथांगा वन्यजीव अभयारण्य की एक तस्वीर भी पोस्ट में जोड़ा था, जिसमें दो हाथी एक सड़क पार करते हुए दिखाई दे रहे हैं।

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष का यह पोस्ट केरल के पलक्कड़ जिले में पटाखों से भरी एक अनानास खाने से हुई एक गर्भवती हाथिनी की मौत पर छिड़े राजनीतिक युद्ध को लेकर था।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

SHARE
Previous articleछोटे रेस्टोरेंट की मदद के लिए इंस्टाग्राम ने की स्विगी-जोमैटो से साझेदारी
Next articleकेंद्र ने जीएसटी मुआवजे के रूप में राज्यों को 36400 करोड़ रुपये जारी किए
बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here