राहुल गांधी ने मिशेल के प्रत्यर्पण से जुड़े प्रश्न को नजरअंदाज किया

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कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने बुधवार को अगस्ता वेस्टलैंड के बिचौलिये क्रिश्चियन मिशेल के प्रत्यर्पण से संबंधित प्रश्नों को टाल दिया और कहा कि प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी को यह बताना चाहिए कि उन्होंने राफेल लड़ाकू विमान सौदे में एक उद्योगपति को 30,000 करोड़ रुपये क्यों दे दिए। उन्होंने यहां पत्रकारों से कहा, “मैं इसका जवाब नहीं दे सकता। कांग्रेस ने अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। प्रधानमंत्री को बताना चाहिए कि क्यों उन्होंने अनिल अंबानी को 30,000 करोड़ रुपये दे दिए।”

प्रधानमंत्री ने राजस्थान की एक रैली में मिशेल के प्रत्यर्पण का जिक्र किया था और उन्होंने(मोदी) इस मामले में कांग्रेस और सोनिया गांधी पर निशाना साधा था। राहुल से इस बारे में सवाल पूछे गए, लेकिन उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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