राधिका मदान ने किया ‘छोले, पुड़ी, हलवा’ के साइड इफेक्ट्स का खुलासा

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अभिनेत्री राधिका मदान ने सोशल मीडिया पर एक मजेदार पोस्ट साझा किया है जो इस बात की ओर इशारा करती है कि वर्कआउट और जायकेदार व्यंजनों का भरपेट आनंद लेने के बाद हालत एक जैसी हो जाती है। राधिका ने इंस्टाग्राम पर एक तस्वीर साझा किया है जिसमें वह जमीन पर थककर लेटी हुई नजर आ रही हैं। तस्वीर में अभिनेत्री ने ब्लैक योगा पैंट के साथ पर्पल-ऑरेंज टी-शर्ट पहन रखा है।

अपने पोस्ट के कैप्शन में वह लिखती हैं, ‘पोस्ट वर्कआउट या पोस्ट छोले पुड़ी हलवा?’

राधिका उन सेलेब्रिटीज में से हैं जो अपने सोशल मीडिया पोस्ट से न केवल अपने प्रशंसकों के साथ जुड़ी रहती हैं बल्कि उनका मनोरंजन भी करती रहती हैं।

अभिनय की बात करें, तो आने वाले समय में वह रोमांटिक कॉमेडी फिल्म ‘शिद्दत’ में नजर आएंगी जिसमें मोहित रैना, डायना मदान और सनी कौशल भी हैं। श्रीधर राघवन और धीरज रतन ने स्क्रिप्ट लिखी है और कुणाल देशमुख ने इसे निर्देशित किया है।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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