मध्य प्रदेश में फूलों की खेती के लिए ‘पुष्पग्राम’ योजना

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मध्यप्रदेश में खेती को फायदे का धंधा बनाने की कोशिशें जारी हैं। इसी क्रम में फूलों की खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर इंदौर को चुना गया है, जहां पुष्पग्राम योजना पर अमल हो रहा है, आगे चलकर सरकार ने पुष्पग्राम योजना को पूरे प्रदेश में लागू करने का मन बनाया है। उद्यानिकी विभाग के अनुसार, इंदौर शहर के आसपास के गांवों को पुष्पग्राम बनाया जा रहा है। इन गांवों में फूलों की खेती और लोरल लैंडस्केप बनाए जाएंगे। इसके जरिए रूरल टूरिज्म को बढ़ावा दिए जाने की योजना है। यहां सेवंती, रजनीगंधी, देशी गुलाब और गेंदे के फूल लगाए जाएंगे। यहां के मेमदी की तरह नैनोद, गुलावट और बसांद्रा को भी फूलों का गांव बनाया जाएगा। मेमदी में इसकी शुरुआत हो चुकी है। इसके लिए किसानों को फ्लोरिकल्चर (फूलों की खेती) की विशेष ट्रेनिंग दी जा रही है।

राज्य के कृषि मंत्री सचिन यादव ने आईएएनएस को बताया, “इंदौर जिला प्रशासन और उद्यानिकी विभाग द्वारा ग्राम मेमदी को पुष्पग्राम के रूप से विकसित किया है, आगे पायलट प्रोजेक्ट के रूप में इंदौर के प्रत्येक विकास खंड के एक-एक ग्राम को पुष्पग्राम के रूप में विकसित करेंगे। इसके बाद हम इसे पूरे प्रोजेक्ट को प्रदेश भर में लागू करेंगे, जिससे खेती लाभ का धंधा बने और इससे किसानों की आय बढ़े।”

उन्होंने बताया कि पुष्पग्राम को रूरल टूरिज्म का भी हिस्सा बनाए जाने की योजना है, ताकि पर्यटक ग्रामीणों के घरों में रहकर गांव के खानपान, रहन-सहन और ताजा शुद्ध हवाओं का आनंद ले सकें, इसके लिए इन गांवों में सैलानियों के लिए होम स्टेट व्यवस्था शुरू की जाएगी। गांववालों को भी इसका फायदा मिलेगा। नए साल की शुरुआत तक यह व्यवस्था मेमदी और गुलावट में शुरू करने की तैयारी है।

मेमदी गांव में सबसे पहले फूलों की खेती शुरू करने वाले किसान रतनसिंह केलवा ने बताया कि सबसे पहले उन्होंने ही गांव में गेंदे की खेती शुरू की थी। इसमें सोयाबीन से कम खर्च लगता है और हर चार दिन में नकद पैसा भी हाथ में आता रहता हैं। इस गांव में गेंदा ही नहीं, सेवंती, गुलदाउदी और गुलदस्तों में लगने वाले जिप्सी फूलों की खेती भी की जा रही है।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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