पंजाब, हिमाचल ने रोपवे परियोजना फिर शुरू की, जानिए इसके बारे में !

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पंजाब और हिमाचल प्रदेश ने खालसा की जन्मस्थली श्री आनंदपुर साहिब को नैना देवी मंदिर से जोड़ने वाली एक रोपवे परियोजना को फिर से शुरू की है। पंजाब के पर्यटन और सांस्कृतिक मामलों के मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू ने हिमाचल के अतिरिक्त मुख्य सचिव (संस्कृति और पर्यटन) राम सुभग सिंह से मुलाकात के बाद शुक्रवार को कहा कि इस परियोजना से न केवल दोनों राज्यों के पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि हिंदू-सिख समुदाय के बीच मित्रता भी बढ़ेगी। सिद्धू और राम के बीच यह बैठक 2014 में आयोजित परियोजना को पुनर्जीवित करने के लिए हुई थी।

राम सुभग ने कहा कि इस परियोजना को हिमाचल सरकार द्वारा गुरुवार को हरी झंडी मिली थी। सिद्धू ने कहा कि 3.5 किलोमीटर वाली इस रोपवे परियोजना में कुल 200 करोड़ रुपये का खर्च आएगा। उन्होंने कहा, “इसमें तीर्थयात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाएगी और बड़ी कंपनियों की सेवाएं ली जाएंगी, ताकि इसमें कोई दुर्घटना न हो।”

खालसा पंत की स्थापना सिखों के 10वें गुरु, गुरु गोबिंद सिंह जी ने 13 अप्रैल, 1699 को आनंदपुर साहिब के गुरुद्वारा तख्त श्री केसगढ़ साहिब में की थी। नैना देवी का मंदिर हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले में है और विभिन्न धर्मो के लाखों लोग यहां दर्शन के लिए आते हैं।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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