पुलवामा आतंकी हमला : सीआरएपीएफ जवान पर हमला कैसे हुआ, यहां जानिए ?

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वेलेंटाइन डे जवानों के बीच बहुत लोकप्रिय नहीं है, फिर भी श्रीनगर में ड्यूटी पर वापस लौट रहे सीआरपीएफ के 76वीं बटालियन के 2500 से ज्यादा जवानों के लिए जम्मू से 2.33 बजे तड़के बस लेना यादगार अनुभव था-जो कि कुछ ही घंटों बाद सबसे दुखद घटना में तब्दील हो गया। सीआरपीएफ के सूत्रों ने कहा कि केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल(सीआरपीएफ) के 78 वाहनों (इसमें 16 वाहनों को जोड़ा गया, जब यह अपराह्न् 2.15 बजे काजीगुंड पहुंचा) के काफिले को लगभग वीरान सड़क से भेजना असमान्य था।

सुरक्षा के दृष्टिकोण से, यह एक आदर्श रणनीति होती क्योंकि पिछले कुछ दिनों से खराब मौसम की वजह से जम्मू-श्रीनगर राजमार्ग पर यातायात नगण्य था। काफिला घटना से केवल एक घंटे दूर -काजीगुंड से करीब 60 किलोमीटर पर पुलवामा के लाथपोरा में था।

ऐसा प्रतीत होता है कि काफिले की सुरक्षा को करीब-करीब हरी झंडी दी गई थी। सीआरपीएफ की रोड ओपनिंग पार्टी(रोप) रोज सुबह आईईडी की उपस्थिति को जांचने के लिए राजमार्गो की जांच करती है। क्षेत्र में सेना की बहुलता है और राजमार्गो पर हमेशा तत्काल प्रतिक्रिया समूह मौजूद रहता है।

काफिला जैसे ही श्रीनगर से 27 किलोमीटर पहले लेथपोरा पहुंचा, एक पीछा कर रही विस्फोटक से भरी कार ने काफिले के पांचवी बस को बांयी तरफ से टक्कर मार दी। विस्फोट में दूसरे बस को भी नुकसान पहुंचा। क्षेत्र में गोलीबारी की आवाज सुनी गई, लेकिन कोई नहीं जानता यह गोलीबारी किसने की। अब शहीद जवानों की संख्या 49 तक पहुंच गई है और कम से कम दर्जन से ज्यादा घायल हैं।

काफिले में मौजूद सीआरपीएफ के एक जवान ने कहा कि जबरदस्त धमाके ने सभी को चौंका दिया। वहां केवल अफरा-तफरी और भ्रम की स्थिति थी-मैं वहां केवल धुआं देख पा रहा था।

उन्होंने कहा, “हमें हमारे वाहनों में वापस जाने के लिए कहा गया।”

सीआरपीएफ के एक अन्य जवान ने कहा, “हमें वाट्सअप संदेश के जरिए इस विस्फोट के बारे में जानकारी मिली। जैसे ही हम बस से नीचे उतरे, हमने अफरा-तफरी देखी-हमने हमारे साथियों के बुरी तरह से जले और कटे हुए अंग देखे और सुलगती हुई आग देखी।”

विस्फोट के तुरंत बाद पाकिस्तान स्थित जैश-ए-मोहम्मद ने हमले की जिम्मेदारी ली। उसने कहा कि दक्षिण कश्मीर के पुलवामा जिले के एक स्थानीय फिदायीन अदिल अहमद डार ने यह हमला किया। इसके साथ ही संगठन ने डार का एक वीडियो भी जारी किया।

हमले की जांच कर रहे राष्ट्रीय जांच एजेंसी के सूत्रों ने कहा कि डार ने संभवत: 150 किलोग्राम अमोनियम नाइट्रेट(सुपर 90)-एक उर्वरक जिसका कम तीव्रता के धमाके के लिए प्रयोग किया जाता है, का प्रयोग किया। जांच अभी शुरुआती दौर में है, इसलिए एनआईए सूत्रों ने पुलवामा हमले में आरडीएक्स के प्रयोग या दो विस्फोटकों की संभावना से इनकार नहीं किया है।

न्यूज स्त्रो आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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