चीन में विदेशी कंपनियों का उत्पादन बहाल

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चीनी वाणिज्य मंत्रालय ने कहा कि चीन के शानतोंग प्रांत में दक्षिण कोरिया की पूंजी वाली 32 कार ऑटो पार्ट्स कंपनियों ने 15 फरवरी से उत्पादन बहाल किया है। अब शांगहाई, शानतोंग और हूनान प्रांत आदि क्षेत्रों में मुख्य विदेशी पूंजी वाले उद्यमों में 80 प्रतिशत उत्पादन बहाल हो चुका है। अनुमान है कि फरवरी के अंत में अधिकांश क्षेत्रों में विदेशी कंपनियां अपना उत्पादन बहाल करेंगी। इससे एक बार फिर जाहिर हुआ है कि 1.4 अरब जनसंख्या वाले चीनी बाजार का बड़ा आकर्षण है।

अब चीन में विदेशी कंपनियों की राय है कि चीनी अर्थव्यवस्था पर नए कोरोना वायरस महामारी का प्रभाव अस्थायी है। चीनी अर्थव्यवस्था का अच्छी दिशा में बढ़ने का रूझान नहीं बदलेगा।

चीन महामारी का प्रभाव निम्नतम स्तर पर कम करने की कोशिश कर रहा है। चीन पूर्वनिर्धारित आर्थिक और सामाजिक लक्ष्य पाने के प्रति विश्वस्त है।

न्यूज स्त्रोत आइएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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