‘झुंड’ की निर्माता ने बताया, अमिताभ और मंजुले को कैसे लाईं साथ

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मेगास्टार अमिताभ बच्चन और ‘सैराट’ के निर्देशक नागराज मंजुले ‘झुंड’ में साथ काम कर रहे हैं, जिसको लेकर उनके प्रशंसक अभी से उत्साहित हैं। फिल्म की निर्माता सविता हिरेमठ ने इस बात का खुलासा किया है कि वे दोनों को साथ लाने में कैसे सफल हुईं।

इससे पहले ‘खोसला का घोसला’ बना चुकीं हिरेमठ ने एक बयान में कहा कि मंजुले से व्यक्तिगत तौर पर मंजुले के लिए वे पुणे गईं थीं।

मंजुले बात करने के दौरान उन्हें एहसास हुआ कि वे अमिताभ के बहुत बड़े प्रशंसक हैं।

सविता ने जब उनसे कहा कि वे अमिताभ के सामने इस किरदार का प्रस्ताव रख सकती हैं, तो मंजुले तुरंत राजी हो गए।

मंजुले के हांमी भरने के बाद सविता ने अमिताभ बच्चन को ‘झुंड’ की कहानी सुनाई। सविता से बातचीत के बाद उन्होंने फिल्म की पटकथा मांगी।

फिलहाल दोनों दिग्गज नागपुर में इस फिल्म की शूटिंग कर रहे हैं।

मंजुले अभी मराठी में ‘कौन बनेगा करोड़पति’ की मेजबानी कर रहे हैं।

सविता ने इस पर टिप्पणी करते हुए कहा, “मेरी फिल्म में केबीसी के दो मेजबान हैं।”

‘झुंड’ नागराज मंजुले की पहली हिंदी फिल्म होगी।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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