प्रो कबड्डी लीग : प्रदीप के कमाल से पटना ने पुनेरी को पटका

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कप्तान प्रदीप नरवाल के रिकॉर्ड 27 अंकों के दम पर मौजूदा चैम्पियन पटना पाइरेट्स ने प्रो कबड्डी लीग (पीकेएल) के छठे सीजन के इंटर-जोन चैलेंज मुकाबले में शुक्रवार को पुनेरी पलटन को एकतरफा अंदाज में 53-36 से करारी मात दी। पटना की टीम यहां गाचीवाबली इंडोर स्टेडियम में खेले गए मुकाबले में पहले 20 मिनट में 24-19 से आगे थीं। टीम ने दूसरे हाफ में भी गजब का प्रदर्शन करते हुए पुनेरी को चारो खाने चित कर दिया।

तीन बार की चैम्पियन पटना की इस सीजन में 17 मैचों में यह नौवीं जीत है। पटना अब 51 अंकों के साथ जोन-बी में दूसरे नंबर पर है। वहीं, पुनेरी को 20 मैचों में 11वीं हार झेलनी पड़ी है। टीम 47 अंकों के साथ जोन-ए में चौथे स्थान पर है।

विजेता पटना के लिए प्रदीप के 27 अंकों के अलावा मंजीत ने छह और विकास काले ने दो अंक लिए। पटना को रेड से 33, टैकल से 12, ऑलआउट से छह और दो अतिरिक्त अंक भी हासिल हुए।

पुनेरी की ओर से मोरे जीबी ने 13, संदीप नरवाल ने सात और परवेश ने तीन अंक हासिल किए। टीम ने रेड से 28, टैकल से छह और तीन अतिरिक्त अंक बटोरे।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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