मतदान करने से पहले मां से मिले मोदी, लिया आशीर्वाद

0
62

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंगलवार को गुजरात में लोकसभा चुनाव में मतदान करने से पहले अपनी 98 वर्षीय मां हीरा बा से मिलने उनके घर गए।

हीरा बा ने अपने बेटे को आर्शीवाद के तौर पर चुनरी, नारियल और 501 रुपये भेंट किए। मां और बेटे ने आपस में मिठाईयों का आदान-प्रदान भी किया।

मोदी अपनी गुजरात यात्रा के दौरान अपनी मां से मिलने जरूर जाते हैं जो उनके छोटे भाई के साथ रहती हैं।

इसके बाद हीरा बा ने भी गांधीनगर स्थित मतदान केंद्र पर मतदान किया। इस क्षेत्र से अमित शाह भाजपा उम्मीदवार हैं।

मोदी अहमदाबाद के रानिप क्षेत्र स्थित निशान स्कूल में मतदान करने गए थे, इस दौरान अमित शाह भी उनके साथ थे।

वोट डालने से पहले मोदी शाह की पोती के साथ खूब खेले, इस दौरान फोटोग्राफरों और वीडियोग्राफरों ने उनकी ढेर सारी तस्वीरे लीं।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


SHARE
Previous articleपाकिस्तानी कप्तान की टीम इंडिया को चेतावनी, विश्व कप से पहले कहा कुछ ऐसा
Next articleमलाइका की वजह से फोटोग्राफर्स पर फिर भड़के अर्जुन कपूर, जमकर निकाला गुस्सा
बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here