प्रधानमंत्री अल्पसंख्यकों के लिए केवल जुबानी बातें करते हैं : असदुद्दीन ओवैसी

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एआईएमआईएम अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने रविवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी केवल जुबानी बातें करते हैं कि अल्पसंख्यक भय के वातावरण में जी रहे हैं। उन्होंने कहा कि वे और उनकी पार्टी भाजपा पिछले पांच साल से यह ‘पाखंड’ कर रही है।

प्रधानमंत्री ने एक दिन पहले कहा था कि अल्पसंख्यक भय के वातारवरण में हैं और उन्होंने इसे दूर करने का आह्वान किया था। इस पर ओवैसी ने कहा कि मोदी संकेत नहीं दे रहे, बल्कि इस मुद्दे ने उनको ‘एक्सपोज’ कर दिया है।

उन्होंने संवाददाताओं से कहा कि अगर मोदी उन गिरोहों पर लगाम लगाते हैं जो गाय के नाम पर मुस्लिमों को पीटते हैं और उनकी हत्या करते हैं तो अल्पसंख्यकों में भय अपने आप दूर हो जाएगा।

मध्य प्रदेश में हाल में गाय के मुद्दे पर मुस्लिमों को पीटने की घटना का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि भाजपा की जीत से इन संगठनों का मनोबल मजबूत हुआ है और अब कोई इनको रोक नहीं सकता।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, जो कि संविधान की शपथ लेंगे, उन्हें जानना चाहिए कि जीने का आधिकार मानव के लिए है, न कि पशुओं के लिए।

उन्होंने कहा कि अगर प्रधानमंत्री इस मूलभूत चीज को समझ लेंगे तो भय अपने आप दूर हो जाएगा, लेकिन भाजपा मौलिक अधिकार को पसंद नहीं करती।

ओवैसी ने गाय के नाम पर अल्पसंख्यकों को पीटने और हत्या करने वालों को भष्मासुर करार दिया।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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