प्रधानमंत्री ने अक्षय पात्र का 3 अरबवां भोजन परोसा

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को वृंदावन चंद्रोदय मंदिर परिसर में स्कूली बच्चों के बीच अक्षय पात्र फाउंडेशन की ओर से तीन अरबवां भोजन परोसा।

बेंगलुरू स्थित फाउंडेशन भारत के 12 राज्यों के 14,702 स्कूलों में 17.6 लाख से अधिक बच्चों को पौष्टिक मध्यान्ह भोजन परोसता है।

मोदी ने अक्षय पात्र फाउंडेशन द्वारा ‘तीन अरबवां भोजन’ सेवा के उपलक्ष्य में एक स्मारक पट्टिका का अनावरण भी किया।

इस कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, स्थानीय सांसद हेमा मालिनी, उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री श्रीकांत शर्मा, लक्ष्मी नारायण चौधरी और अनुपमा जायसवाल उपस्थित थीं।

बाल पोषण, टीकाकरण और स्वच्छता के क्षेत्र में धीमी गति से काम करने के लिए पिछली सरकारों पर हमला बोलते हुए मोदी ने कहा कि अतीत में बहुत सफलता नहीं मिली है।

पिछले 55 महीनों से केंद्र सरकार बच्चों और माताओं के पोषण और स्वास्थ्य के लिए काम कर रही है।

उन्होंने कहा, “बाल पोषण, टीकाकरण और स्वच्छता की व्यवस्था ऐसे विषय हैं, जिन पर पहले चर्चा नहीं की गई थी। हमने इन सभी पहलुओं पर चर्चा की। कई योजनाएं भी शुरू की गईं, लेकिन अतीत में बहुत सफलता नहीं मिली।”

उन्होंने यह भी कहा कि इन क्षेत्रों में कम सुविधाओं वाले देश भी भारत से आगे रहे हैं।

उन्होंने कहा, “इस स्थिति को खत्म करने के लिए हम 2014 से टीकाकरण, स्वच्छता और बाल पोषण के क्षेत्र में नई रणनीति के साथ काम कर रहे हैं और इन्हें एक मिशन मोड पर संचालित करने का निर्णय लिया है।”

मिशन इंद्रधनुष के बारे में उन्होंने कहा कि योजना के शुभारंभ के बाद से तीन करोड़ 40 लाख से अधिक बच्चों और 90 लाख माताओं को टीका लगाया गया था।

उन्होंने कहा कि स्कूलों में भोजन परोसने की अवधारणा -मध्यान्ह भोजन- एक पुरानी अवधारणा है।

उन्होंने कहा, “हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि बच्चों को स्वच्छ और पर्याप्त पौष्टिक भोजन मिले।”

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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