भाजपा के चुनावी रोबोट होकर रह गए हैं प्रधानमंत्री : कांग्रेस

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए उत्तर प्रदेश कांग्रेस ने कहा कि प्रधानमंत्री आज सारी मानवीय संवेदनाओं से परे, मात्र भाजपा के चुनावी रोबोट होकर रह गए हैं, वरना ऐसे कैसे हो सकता है कि उनके संसदीय क्षेत्र वाराणसी में इतने भीषण हादसे के बावजूद उस क्षण नई दिल्ली स्थित भाजपा के फाइव स्टार कार्यालय में कर्नाटक की जीत का जश्न मना रहे थे।

विपक्षी पार्टी ने कहा कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने उसी जलसे में वाराणसी हादसे में मारे गए लोगों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त करने की सतही और हल्के तौर पर रस्म अदायगी भी कर ली। जहां वाराणसी के लोग शोक में डूबे थे, वहीं यहां के सांसद मोदी दिल्ली में कर्नाटक की अधूरी जीत के नशे में मस्त थे।

प्रदेश कांग्रेस के महामंत्री एवं प्रवक्ता अरुण प्रकाश सिंह ने आईपीएन से बातचीत में कहा, “यह हादसा प्राकृतिक या कोई अनहोनी घटना न होकर पूरी तरह से प्रशासन और निर्माण एजेंसियों की घोर लापरवाही और आम जन के जान-माल के प्रति उपेक्षा का दुष्परिणाम है, फिर भी हमारे मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री में कोई अपराधबोध या संवेदना नहीं है।”

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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