प्रधानमंत्री मोदी ने जस्टिन ट्रूडो का गले लगाकर स्वागत किया

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को राष्ट्रपति भवन में एक औपचारिक समारोह में कनाडाई समकक्ष जस्टिन ट्रूडो को गले लगाकर स्वागत किया। मोदी द्वारा ट्रूडो का गर्मजोशी से स्वागत करने के बाद उन अटकलों पर विराम लग गया है, जिनमें कहा जा रहा था कि सरकार का रवैया कनाडाई प्रधानमंत्री के प्रति उदासीन है।

आपको बता दें कि जस्टिन टड्रो अपनी पत्नी सोफी और बच्चों जेवियर, एला-ग्रेस और हाड्रियन के साथ जैसे ही कार से राष्ट्रपति भवन के प्रांगण में उतरे, मोदी ने उनसे (ट्रूडो) हाथ मिलाया और फिर गले लगा लिया। कनाडाई प्रधानमंत्री के 17 फरवरी को भारत आने के बाद से चुप्पी साधे मोदी ने अपनी चुप्पी तोड़ते हुए गुरुवार को कहा कि उन्हें शुक्रवार को होने वाली द्विपक्षीय बैठक का इंतजार है।

मोदी ने ट्वीट कर कहा था, “मैं दोनों देशों के संबंधों के प्रति उनकी (ट्रूडो) गहरी प्रतिबद्धता की सराहना करता हूं।”

मोदी ने गुरुवार को ट्रूडो की बेटी एला-ग्रेस की मजाकिया ढंग से कान ऐंठते हुए तस्वीर ट्वीट की थी। इस तस्वीर में ट्रूडो मुस्कुराते हुए दिख रहे हैं। यह तस्वीर मोदी के 2015 में कनाडा दौरे की है।

मोदी ने ट्वीट कर कहा, “मैं खासकर उनके बच्चों जेवियर, एला-ग्रेस और हाड्रियन से मिलने के लिए उत्सुक हूं।” कनाडाई प्रधानमंत्री भारत की सप्ताह भर की यात्रा के दौरान अब तक आगरा, अहमदाबाद, मुंबई और अमृतसर का दौरा कर चुके हैं। हाल के दिनों में दोनों देशों के बीच रिश्तों में खटास देखने को मिली है, क्योंकि कनाडा स्वतंत्र खालिस्तान की मांग करने वाले अलगाववादियों के प्रति नरम रुख दिखाई देता है।

वहीं, स्थिति गुरुवार को तब और विवादास्पद हो गई जब कनाडा उच्चायोग ने ट्रूडो के सम्मान में होने वाले रात्रि भोज में खालिस्तानी अलगाववादी जसपाल अटवाल को निमंत्रण दिया था।

हालांकि, बाद में उच्चायोग ने इसे रद्द कर दिया। भारतीय विदेश मंत्रालय का कहना है कि वह इस बात की जांच कर रहा है कि कनाडाई पासपोर्ट धारक अटवाल को वीजा कैसे जारी किया गया।

ट्रूडो ने बाद में कहा कि इस मामले को बेहद गंभीरता से लिया जा रहा है। अटवाल को निमंत्रण नहीं दिया जाना चाहिए था। इस द्विपक्षीय सम्मेलन के मद्देनजर दोनों देशों के बीच कई समझौते होने की उम्मीद है।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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