प्रधानमंत्री मोदी चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मिले

0
63

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जी-20 सम्मेलन से इतर शुक्रवार को यहां चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात कर द्विपक्षीय रिश्ते के सभी पहलुओं पर आपसी विश्वास व मैत्री को आगे बढ़ाने के लिए संयुक्त प्रयासों के संबंध में बातचीत की। एक साल में दोनों नेताओं की यह चौथी मुलाकता थी जिसे उत्साहपूर्ण व उत्पादक बताया गया।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने एक ट्वीट के जरिए कहा, “वुहान के उत्साह में मजबूती लाने के लिए साथ-साथ काम कर रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चीन के राष्ट्रपति शी से मुलाकात जोशपूर्ण और उत्पादक रही। जी-20 सम्मेलन के मौके पर दोनों नेताओं की यह एक साल में चौथी मुलाकात थी। द्विपक्षीय रिश्ते के सभी पहलुओं पर आपसी विश्वास व मैत्री को आगे बढ़ाने के लिए संयुक्त प्रयासों के संबंध में बातचीत हुई।”

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


SHARE
Previous articleअपने फ़ोन की सेटिंग्स में करले ये चेंज और पाए तेज़ इन्टरनेट का मज़ा
Next articleचोट के कारण लंबे समय तक बाहर हुए सांचेज : जोस मोरिन्हो
बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here