प्रधानमंत्री मोदी ने भारत-नेपाल की विरासत पर दिया जोर

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प्रधानमंत्री नेरेंद्र मोदी ने अपने नेपाली समकक्ष के.पी. शर्मा ओली के साथ संयुक्त रूप से जोगबनी-बिराटनगर में दूसरी एकीकृत जांच चौकी (आईसीपी) का मंगलवार को उद्घाटन किया। जोगबनी-बिराटनगर दोनों देशों के बीच महत्वपूर्ण व्यापार केंद्र है। आईसीपी सभी तरह की आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित है।

जोगबनी-बिराटनगर में दूसरी एकीकृत जांच चौकी भारत-नेपाल सीमा पर व्यापार और लोगों के आवागमन की सुविधा के लिए भारतीय सहायता से बनाई गई है।

दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए इसका उद्घाटन किया। इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “भारत नेपाल के सर्वांगीण विकास में एक विश्वसनीय भागीदार की भूमिका निभा रहा है। ‘पड़ोसी पहले’ मेरी सरकार की नीति है और ऐसे में सीमा पार कनेक्टिविटी में सुधार इसका एक महत्वपूर्ण पहलू है।”

भारत-नेपाल की विरासत पर जोर देते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “यदि यह दोनों देशों को चिंतित करता है तो बेहतर कनेक्टिविटी का मुद्दा और अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है, क्योंकि हमारे संबंध केवल पड़ोसी के नहीं हैं। इतिहास और भूगोल ने हमें संस्कृति, प्रकृति, परिवारों, भाषा, विकास और कई अन्य धागों से जोड़ा है।”

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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