प्रधानमंत्री ने पूर्व हॉकी खिलाड़ी बलबीर सिंह सीनियर के निधन पर जताया शोक

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भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूर्व हॉकी खिलाड़ी बलबीर सिंह सीनियर के निधन पर शोक व्यक्त किया है। महान हॉकी खिलाड़ी का सोमवार को लंबी बीमारी के बाद 96 साल की उम्र में निधन हो गया। मोदी ने ट्वीट करते हुए लिखा, “पदमश्री बलबीर सिंह जी को उनके बेहतरीन प्रदर्शन के लिए याद रखा जाएगा। उन्होंने देश को गौरवांवित किया और की उपलब्धियां लेकर आए। वह बिना किसी संदेह के शानदार हॉकी खिलाड़ी थे। वह एक कोच के तौर पर भी काफी सफल रहे। उनके निधन की खबर सुनकर दुखी हूं। उनके परिवार और शुभचिंतकों के साथ मेरी संवेदनाएं।”

बलबीर सिंह के परिवार ने उनके निधन की जानकारी दी। बीते कुछ दिनों से उनकी तबीयत खराब चल रही थी। मोहाली के फोर्टिस अस्पताल में उनका ईलाज चल रहा था। वह र्अधकौमा वाली स्थिति में थे।

आठ मई को उन्हें तेज बुखार और सांस लेने में तकलीफ होने के कारण अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उनका कोविड-19 का टेस्ट भी कराया गया थो जो निगेटिव आया था।

बलबीर सिंह सीनियर 1948 के लंदन ओलंपिक, 1952 के हेलसिंकी ओलंपिक और 1956 के मेलबर्न ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतने वाली टीम के सदस्य थे।

मेलबर्न ओलंपिक में बलबीर सिंह सीनियर ने भारतीय हॉकी टीम का नेतृत्व किया था।

वह 1975 में विश्व कप जीतने वाली टीम के कोच थे साथ ही उन्हीं के कोच रहते हुए हुए टीम ने 1971 का विश्व कप में कांस्य पदक जीता ता। 1957 में में उन्हें पद्मश्री मिला था।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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