राष्ट्रपति ने लोगों से कोरोना संकट में अनुशासन का पालन करने का आग्रह किया

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राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने शनिवार को लोगों से अनुशासन का पालन करने और कोविड -19 महामारी के दौरान खुद को बचाने के लिए शारीरिक दूरी बनाए रखने का आग्रह किया। उन्होंने राष्ट्रपति भवन से धर्म चक्र दिवस का उद्घाटन करते हुए आषाढ़ पूर्णिमा के अवसर पर यह बात कही।

राष्ट्रपति ने कहा, “हम एक ऐसे महामारी के बीच में हैं, जिसने पूरी मानवता को व्याकुल कर दिया है। शायद दुनिया का कोई भी हिस्सा इस आपदा से अछूता नहीं है, और इसने हर व्यक्ति पर प्रतिकूल प्रभाव डाला है। हमें कुछ अनुशासन का पालन करना होगा और शारीरिक दूरी बनाए रखनी होगी।”

भगवान बुद्ध की सीखों और उनके द्वारा दिखाए गए मार्ग के बारे में बताते हुए अपने संबोधन में कोविंद ने कहा, “इस साल दुनिया को बहुत क्षति पहुंची है, और मैं मन से चाहता हूं कि यह पवित्र दिन आशाओं की एक नई किरण और खुशी की नई लहर लेकर आए।”

राष्ट्रपति कोविंद ने कहा, “मैं यह भी प्रार्थना करता हूं कि यह सभी के मन में ज्ञान का दीपक जलाए।”

केंद्रीय संस्कृति मंत्री प्रहलाद पटेल, अल्पसंख्यक मामलों के राज्य मंत्री (एमओएस) किरन रिजिजू और सांसद विनय सहस्रबुद्धे ने भी कार्यक्रम के उद्घाटन समारोह के दौरान संबोधित किया।

इस दिन को गुरु पूर्णिमा के तौर पर भी मनाया जाता है, जिसमें बौद्ध धर्म के लोग और हिंदु दोनों अपने गुरुओं के प्रति श्रद्धा भाव व्यक्त करते हैं। राष्ट्रपति कोविंद ने कहा कि मानव पीड़ा के लिए बुद्ध का तरीका आज भी उतना ही प्रासंगिक है, जितना कई साल पहले था।

उन्होंने कहा, “आज, दुनिया भर में महामारी मानव जीवन और अर्थव्यवस्था को तबाह कर रही है, बुद्ध का संदेश एक प्रकाश की तरह काम करता है।”

उन्होंने लोगों को लालच, घृणा, हिंसा, ईष्र्या और कई अन्य विरोधाभासों से खुद को दूर करने की सलाह दी।

राष्ट्रपति ने कहा, “भारत में, हम बौद्ध धर्म को उत्कृष्ट सत्य की एक नई अभिव्यक्ति के रूप में देखते हैं। आधुनिक समय में दो असाधारण महान भारतीय एक महात्मा गांधी और दूसरे बाबा साहब अंबेडकर ने बुद्ध के शब्दों से प्रेरणा पाई और राष्ट्र के भाग्य को नया आकार दिया।”

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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