राष्ट्रपति ट्रंप के व्यापार सलाहकार ने ट्रूडो के लिए अपमानजनक शब्दों पर माफी मांगी

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व्हाइट हाउस के व्यापार सलाहकार पीटर नावेरो ने कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के लिए इस्तेमाल किए गए अपमानजनक शब्दों को लेकर माफी मांग ली है। पीटर ने अपने विवादित बयान में कहा था,”ट्रूडो के लिए नरक में विशेष स्थान है।”

गौरतलब है कि इस्पात और एल्यूमिनियम पर आयात शुल्क लगाए जाने को लेकर ट्रंप और ट्रूडो के बीच मतभेद हैं।

नावेरो ने कहा, “अपना संदेश देने में मैंने अनुपयुक्त भाषा का इस्तेमाल किया। मैं स्वीकार करता हूं कि यह मेरी गलती थी, वे मेरे शब्द थे।”

यह पूछने पर कि क्या वह अपने बयान को लेकर पछता रहे हैं, इसके जवाब में नावेरो ने कहा, “हां, बिल्कुल।”

गौरतलब है कि पिछले सप्ताह क्यूबेक में जी7 सम्मेलन के बाद नावेरो ने 10 जून को फॉक्स न्यूज को कहा था, “राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ कूटनयिक संबंधों में ईमानदारी नहीं बरतने और उनकी पीठ में खंजर खोंपने वाले विदेशी नेताओं के लिए नरक में विशेष स्थान है।”

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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