राष्ट्रपति ट्रंप ने देश की ओर से कैवनॉग से माफी मांगी

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश ब्रेट कैवनॉग और उनके परिवार से देश की ओर से माफी मांगी की है। ट्रंप ने कहा कि कैवनॉग के खिलाफ डेमोक्रेट के नेतृत्व में झूठ और धोखे का प्रचार किया गया ताकि कैवनॉग को जज बनने से रोका जा सके।

फॉक्स न्यूज के मुताबकि, ट्रंप ने सोमवार रात व्हाइट हाउस के ईस्ट रूम में कैवनॉग के शपथ ग्रहण कार्यक्रम के दौरान यह टिप्पणी की।

ट्रंप ने कहा, “हमारे देश की ओर से मैं ब्रेट कैवनॉग और उनके पूरे परिवार से इस भयावह दुख और पीड़ा के लिए माफी मांगता हूं, जिससे वे गुजरे हैं।”

राष्ट्रपति ने कहा, “ऐसे लोग जो हमारे देश की सेवा के लिए आगे आए, वे निष्पक्ष एवं सम्मानित जीवन चाहते हैं न कि झूठ और धोखे पर आधारित राजनीतिक और निजी क्षति का प्रचार। कैवनॉग के परिवार के साथ जो हुआ, वो निष्पक्षता और सलीके का उल्लंघन है।”

कैवनॉग ने शपथ ग्रहण के बाद कहा, ‘मैं बड़े आभार के साथ यह पद ग्रहण करता हूं। मेरा लक्ष्य सभी अमेरिकियों के लिए न्याय करना है। मैं इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए कड़ा परिश्रम करूंगा। मुझे सिर्फ एक पार्टी या एक हित साधने के लिए नियुक्त नहीं किया गया है।”

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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