हेक्टिक वर्क शेड्यूल की मानसिक रूप से कर रही हूं तैयारी : Vani Kapoor

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अभिनेत्री वाणी कपूर की अगले कुछ महीनों में बैक-टू-बैक तीन फिल्में आने वाली हैं, इनमें ‘बेल बॉटम’, ‘शमशेरा’ और ‘चंडीगढ़ करे आशिकी’ शामिल हैं। वाणी का कहना है कि आने वाले महीनों में बेहद व्यस्ततापूर्ण प्रोमोशन शेड्यूल के लिए वह खुद को मानसिक तौर पर अभी से तैयार कर रही हैं। ‘बेल बॉटम’ 28 मई, ‘शमशेरा’ 25 जून और ‘चंडीगढ़ करे आशिकी’ 9 जुलाई को रिलीज होने वाली है।

वाणी कहती हैं, “तीन महीनों में मेरी एक के बाद तीन फिल्में रिलीज होने वाली हैं इसलिए मैं एक व्यस्ततापूर्ण दिनचर्या के लिए खुद को मानसिक रूप से अभी से तैयार कर रही हूं क्योंकि मुझे ‘बेल बॉटम’, ‘शमशेरा’ और ‘चंडीगढ़ करे आशिकी’ इन फिल्मों के लिए लगातार प्रचार करना होगा। मुझे नहीं लगता है कि अगले पांच महीनों में मेरे पास खुद के लिए पांच मिनट भी होंगे, हालांकि मैं शिकायत बिल्कुल भी नहीं कर रही हूं।”

न्यूज सत्रोत आईएएनएस

 

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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