प्रयागराज कुंभ: बसंत पंचमी पर तीसरा शाही स्नान, लाखों लोगों ने लगाई डुबकी

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जयपुर। बसंत पंचमी पर कुंभ मेले का तीसरा और आखिरी शाही स्नान सम्पन्न हुआ। हिंदू मान्‍यता के अनुसार बसंत पंचमी के दिन देवी सरस्‍वती का जन्म दिन माना जात है।  इसलिए बसंत पंचमी के दिन संगम स्थल पर श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रहती है।

हिंदू धर्म में मान्यता है की बसंत पंचमी के दिन  विद्या की देवी सरस्वती के अवतरण माना जाता है इसके साथ ही बसंत पंचमी से ऋतु परिवर्तन होता है। कुंभ मेले में जिन लोगो ने कल्पवास किया है उन लोगो को बसंत पंचमी के दिन पीले वस्त्र धारण करने होते हैं।

संगम तट बसंत पंचमी के दिन आस्था और श्रद्धा का सैलाब उमड़ा है, इस दिन श्रद्धालु संगम तट पर स्नान करने के लिए आते है, बसंत पंचमी के दिन अलग-अलग अखाड़े के साधु संत आखिरी शाही स्नान में हिस्सा लेते हैं। शाही स्नान के दिन अखाड़ों के साधु संयासी के स्नान करने के बाद आम श्रद्धालु संगम में आस्था की डुबकी लगाते हैं।

बसंत पंचमी के दिन हुए तीसरे शाही के लिए प्रशासन के दवारा पूरी तैयारी पहले से ही पूरी की जा चूकी थी। प्रयागराज में बसंत पंचमी के मौके पर तीसरा और आखिरी शाही स्नान हुआ, जिसके लिए देशभर के साधु संत प्रयागराज में पहुंचे हुए थे। संगम तट पर आस्था की डुबकी लगाने के लिए लाखों श्रद्धालु भी देश के कोने कोने से प्रयागराज में आएं हुए थे।

धर्म, अध्यात्म के दिव्य, भव्य, सुन्दर और स्वच्छ कुम्भ नगरी में वसंत पंचमी पर श्रद्धालुओं का जन सैलाब उमड़ा, वहीं 13 अखाड़ों के साधु-संतों ने भी गंगा, यमुना व अदृश्य सरस्वती के संगम पर भव्य आकर्षक और गाजे बाजों के साथ हर-हर महादेव के उद्घोष के साथ तीसरा शाही स्नान किया।सबसे पहले श्री पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी व श्री पंचायती अटल अखाड़ा ने पूर्वान्ह 6:15 बजे स्नान किया। उसके बाद पंचायती निरंजनी अखाड़ा, तपोनिधि श्री पंचायती आनन्द अखाडा ने पूर्वान्ह 7:05 बजे संगम तट पर पहुंचकर स्नान किया।

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