प्रसाद ने किया खुलासा, मयंक को क्यों बुलाया गया था इंग्लैंड

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मयंक अग्रवाल को इंग्लैंड एंड वेल्स में हुए विश्व कप के दौरान ऑलराउंडर विजय शंकर के चोटिल होने पर टीम में शामिल किया गया था। उस समय सभी को लगा कि टीम प्रबंधन अग्रवाल को भविष्य में भारत की वनडे टीम के हिस्से के रूप मे भी देख रहा है, लेकिन विंडीज दौरे के लिए चुनी गई वनडे टीम में सलामी बल्लेबाज को शामिल न करके चयनकर्ताओं ने सभी को हैरत में डाल दिया है। विश्व कप के दौरान सबसे पहले ऋषभ पंत को चोटिल हुए सलामी बल्लेबाज शिखर धवन के स्थान पर टीम में शामिल किया गया और फिर शंकर के चोटिल होने पर मयंक को टीम के साथ जोड़ा गया। मुख्य चयनकर्ता एम.एस. के प्रसाद ने कहा कि उन्होंने टीम प्रबंधन की मांग के मुताबिक कार्य किया।

प्रसाद ने कहा, “सीरीज के बीच में मैं संवाददाता सम्मेलन में हिस्सा नहीं लेता हूं जिसने कई अफवाहों को जन्म दिया। जब धवन चोटिल हुए तब हमारे पास लोकेश राहुल के रूप में तीसरा सलामी बल्लेबाज मौजूद था। हमारे पास एक बाएं हाथ का बल्लेबाज नहीं था तो टीम प्रबंधन ने उसकी मांग की और हमारे पास पंत के अलावा और कोई विकल्प नहीं था। कई लोगों को हैरानी थी कि सलामी बल्लेबाज की जगह मध्यक्रम के बल्लेबाज को क्यों बुलाया गया और फिर विजय शंकर की जगह एक सलामी बल्लेबाज को।”

प्रसाद ने कहा, “जब शंकर चोटिल हुए उसके बाद एक मैच में राहुल भी बाउंड्री के पास गिर गए इसलिए हमारे सामने एक मेडिकल इमर्जेसी आई कि वो खेलना जारी रख पाएंगे या नहीं। उस समय लिखित में सलामी बल्लेबाज की मांग की गई और हम मयंक की तरफ गए।”

वेस्टइंडीज के खिलाफ भारत को दो टेस्ट, तीन वनडे और तीन टी-20 मैच खेलने हैं।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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