बाहुबली’ बनने के लिए प्रभास ने अपनाया था ये वर्कआउट प्लान, ऐसी थी उनकी डाइट

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‘साल की मच अवेटेड फिल्म ‘बाहुबली 2: द कन्क्लूजन’ ने लिए जितना इंतजार फैन्स ने किया है उतनी ही मेहनत प्रभास ने भी इसके लिए की है।

दरअसल प्रभास ने फिल्म के लिए डबल मेहनत की है क्योंकि इस फिल्म में उनको पिता और बेटे दोनों का अभिनय करना था।

ऐसे में उन्हें यंग कैरेक्टर में टोन बॉडी मस्कुलर लुक में दिखना था तो वहीं दूसरे में उन्हें थोड़ा उम्रदराज। इसके लिए प्रभास ने जिम में काफी मेहनत की और एक विशेष डाइट प्लान तैयार फॉलो किया।

हाल ही में प्रभास के फिटनेस ट्रेनर लक्ष्मण रेड्डी ने एक लीडिंग वेबसाइट को दिए इंटरव्यू में इसकी डिटेल दी है। उन्होंने बताया कि फिट कैरेक्टर के लिए प्रभास को करीब 100 किलो वजन चाहिए था।

प्रभास फिटनेस के लिए रोज 5 घंटे जिम में वर्कआउट करते थे। प्रभास की डाइट में रोजाना 50 व्हाइट अंडे, आधा किलो चिकिन, सलाद, फ्रूट और ब्राउन राइज आदि की मात्रा अधिक थी।

इस दौरान जंक फूड बिल्कुल अलाउड नहीं था।


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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