Bihar election में सियासी मुद्दे तलाशने में जुटे राजनीतिक दल

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बिहार विधानसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा अब तक नहीं हुई है, लेकिन सभी प्रमुख राजनीतिक दल उन चुनावी मुद्दों की तलाश में जुटे हैं जो उन्हें बिहार की सत्ता के करीब पहुंचाने में मदद कर सके। लेकिन सबसे बड़ी बात है कि इस चुनाव में मुद्दा क्या होगा?

बिहार के विभिन्न क्षेत्रों में आम लोग जहां क्षेत्रीय समस्याओं को अपने स्तर पर चुनावी मुद्दा बनाने में लगे हैं वहीं कई दल अपनी-अपनी सुविधा के अनुसार मतदाताओं को आकर्षित करने के जुगाड़ में लगे हुए हैं।

वैसे बिहार में जातीय समीकरण के आधार पर जोड़-तोड की राजनीति कोई नई बात नहीं है। पिछले विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) विकास के मुद्दे पर चुनावी मैदान में उतरा था, लेकिन मुख्यमंत्री का चेहरा सामने नहीं था। इस बार राजग नीतीश कुमार के नेतृत्व में चुनावी मैदान में उतरने की घोषणा कर चुकी है।

वैसे इस चुनाव में पिछले चुनाव की तुलना में परिस्थितियां बदली हुई हैं, जद (यू) एक बार फि र राजग में शामिल हो गई है वहीं राष्ट्रीय लेाक समता पार्टी (रालोसपा) विपक्षी दलों के महागठबंधन में कांग्रेस और राजद के साथ है।

राजनीतिक विश्लेषक सुरेन्द्र किशोर का मानना है कि इस चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार का जीरो भ्रष्टाचार का दावा राजग के लिए प्रमुख मुद्दा होने की संभावना है।

उन्होंने कहा, इसके अलावे राष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न पुरानी समस्याओं के निपटारे को भी राजग के नेता मतदाताओं के बीच लेकर जाएंगें। इसके अलावा बिहार में राजग की सरकार में किए गए विकास कायरें और केंद्र सरकार की मिल रही मदद के जरिए भी राजग के नेता मतदाताओं को आकर्षित करने की कोशिश करेंगे।

इधर, राजद नेतृत्व वाले महागठबंधन के नेता कोरोना काल में प्रवासी मजदूरों को मदद नहीं करने और बेरोजगारी को मुद्दा बनाने में जुटी है।

किशोर भी मानते हैं कि विपक्ष बेरोजगारी को मुद्दा बनाकर सत्ता पक्ष को घेरने की कोशिश करेगा।

उन्होंने कहा कि महागठबंधन कोरोना काल में प्रवासी मजदूरों के पैदल आने और उचित सहायता नहीं देने को लेकर चुनाव मैदान में जरूर उतरेगा, लेकिन इसमें कोई शक नहीं है कि राजग के नेता आक्रामक रूप से इसका जवाब भी देंगे।

किशोर यह भी कहते हैं कि राजग के नेता एक बार फि र से बिहार में ‘जंगलराज’ की याद दिलाते हुए नजर आएंगें।

वैसे माना जाता है कि राजग के नेता चुनावी समर में यह भी कहते नजर आएंगे कि बिहार में भी उसी की सरकार बननी चाहिए जिसकी सरकार केंद्र में है। इससे आपसी तालमेल के जरिए विकास करना आसान हो जाता है।

माना जाता है कि विकास के पैमाने पर नीतीश और नरेंद्र मोदी दोनों खरे उतरते हैं। दोनों के राजनीतिक करियर में यही एक समानता है कि जब भी इन्हें मौका मिला, इन्होंने अपने नेतृत्व से विकास की एक ऐसी लकीर खींची, जिसके आम लोगों के साथ-साथ विरोधी भी प्रशंसा करते रहे हैं।

वैसे, कहा यह भी जा रहा है कि राज्य के कई क्षेत्र में स्थानीय मुद्दे भी इस चुनाव में अहम भूमिका निभाते नजर आएंगे।

बहरहाल, अब देखना होगा कि कौन सा मुद्दा यहां के मतदाताओं को आकर्षित करने में सफ ल होता है।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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