राजनीतिक दलों का संचालन कार्यकर्ताओं के दान से हो न कि कालेधन से : शाह

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भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) अध्यक्ष अमित शाह ने चुनाव के लिए धन की शुचिता पर जोर देते हुए सोमवार को कहा कि राजनीतिक दलों का संचालन कार्यकर्ताओं के दान से होना चाहिए न कि अमीरों के कालेधन से। पार्टी विचारक व संरक्षक पंडित दीन दयाल उपाध्याय की 51वीं पुण्यतिथि पर आयोजित एक कार्यक्रम में यहां भाजपा अध्यक्ष ने कहा, “दीन दयाल उपाध्यायजी इस बात पर जोर देते थे कि अगर पार्टी को स्वच्छ रखना है तो स्वच्छ वित्तपोषण जरूरी है।”

शाह ने कहा, “अगर साधन शुद्ध नहीं है तो शुचिता से लक्ष्यों की प्राप्ति नहीं हो सकती है। अगर कोई पार्टी अमीरों के दान और कालेधन से चलती है तो उसका लक्ष्य दूषित हो जाता है।”

उन्होंने कहा कि खुद रानीतिक दल के अध्यक्ष के रूप में वह कह सकते हैं कि भाजपा अपने सारे चुनावी खर्च का प्रबंध पार्टी के कार्यकर्ताओं से प्राप्त योगदान से नहीं कर सकती है। उन्होंने कहा, “यह संभव नहीं है।”

उन्होंने चुनावी खर्च को लेकर एक सार्वजनिक बहस और चुनाव के लिए वित्तपोषण में ईमानदारी की आवश्यकता पर बल दिया।

उन्होंने कहा, “इस तरह की कवायद भाजपा के नेतृत्व में शुरू होगी।”

राजनीतिक दलों को मिलने वाले दान में पारदर्शिता लाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार द्वारा उठाए गए कदमों का स्वागत करते हुए शाह ने कहा, “मोदी सरकार ने राजनीति में काले धन के प्रभुत्व पर लगाम लगाने के लिए कदम उठाते हुए नकदी में दान की सीमा 2,000 रुपये तय की है।”

उन्होंने कहा कि सरकार ने भ्रष्टाचार के खिलाफ इतने सख्त कानून बनाए हैं कि इनको तोड़ने वाले या तो पकड़े जा रहे हैं या दिल्ली की सर्दी में भी उनको पसीने छूट रहे हैं।

भाजपा अध्यक्ष ने दावा किया कि भगोड़े कारोबारी विजय माल्या और नीरव मोदी को देश के सख्त कानून के ताप का अनुभव हो रहा है। उन्होंने कहा, “कानून की पकड़ में आने के डर से वे देश से भाग खड़े हुए।”

भाजपा के गठन में उपाध्याय की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए शाह ने कहा, “उन्होंने ऐसी पार्टी बनाई जिसका संचालन इसके नेताओं के आभामंडल से नहीं बल्कि पार्टी के कार्यकर्ताओं और संगठन से होता है।”

उन्होंने कहा कि उपाध्याय ने पार्टी को मजबूत बनाने और इसकी विचारधारा को स्वीकार्य बनाने के लिए काम किया और इस बात पर जोर दिया कि पार्टी को घटिया साधनों से चुनाव नहीं जीतना चाहिए।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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