परमाणु हथियार का इस्तेमाल पहले न करने की नीति भविष्य पर निर्भर : राजनाथ

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रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार को घोषणा की कि परमाणु नीति में ‘पहले हमला नहीं करने’ की भारत की प्रतिबद्धता भविष्य की परिस्थितियों पर निर्भर करेगी। सिंह ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की पहली पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि देने के बाद भारत के परमाणु हथियारों के परीक्षण स्थल पोखरण से एक ट्वीट साझा किया।

रक्षामंत्री ने ट्वीट किया, “पोखरण, अटलजी के भारत को परमाणु शक्ति बनाने के ²ढ़ संकल्प का गवाह है। हम अभी तक इसके ‘नो फस्र्ट यूज’ के सिद्धांत के प्रति प्रतिबद्ध हैं। भारत ने इस सिद्धांत का सख्ती से पालन किया है। भविष्य में क्या होता है, यह परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।”

सिंह का यह बयान जम्मू-कश्मीर पर पाकिस्तान द्वारा दिए गए युद्धकारी व भड़काऊं बयानों के बाद आया है। पाकिस्तान भारत द्वारा जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद-370 को निष्प्रभावी करने के बाद से ही बौखलाया हुआ है और इस मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र में भी प्रमुखता से उठाने की बात कर रहा है।

सिंह अंतर्राष्ट्रीय स्काउट्स मास्टर्स प्रतियोगिता के समापन समारोह में भाग लेने के बाद शुक्रवार को पोखरण पहुंचे।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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