पीएम मोदी काशी पहुंचे, काशी विश्वनाथ मंदिर में किया पूजन

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लोकसभा चुनाव जीतने के बाद नवनिर्वाचित सांसद नरेंद्र मोदी आज (सोमवार को) पहली बार अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी पहुंचे। इस दौरान उनका स्वागत प्रदेश के राज्यपाल रामनाईक, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र नाथ पांडेय ने किया।

मोदी के आगमन को लेकर कई जगहों पर कार्यक्रमों का आयोजन किया गया है। मोदी ने यहां सबसे पहले काशी विश्वनाथ मंदिर के दर्शन कर भगवान का आशीर्वाद लिया और विशेष पूजा की। इसके बाद मोदी भाजपा कार्यकतार्ओं को संबोधित करेंगे। इस दौरान कई जगह लोग उनका पुष्पों से स्वागत भी करेंगे। जगह-जगह सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किये गए हैं।

प्रधानमंत्री की यात्रा के मद्देनजर सुरक्षा के भारी बंदोबस्त किये गये हैं। मोदी के आने-जाने के मार्ग में अर्धसैनिक और विशेष सुरक्षा दलों को बड़ी संख्या में तैनात किया गया हैं।

मोदी इस दौरान कार्यकतार्ओं और वाराणसी की जनता को धन्यवाद भी देंगे।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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