हिजाब पहनना ज़रुरी था, इसलिए शतरंज एशियन नेशंस कप चैंपियनशिप में ईरान जाने से कर दिया मना

ईरान में सिर्फ ईरानी ही नहीं बल्कि ईरान में आईं बाहरी देशों की महिलाओं को भी हिजाब पहनना फर्ज़ है। मतलब कि आप किसी भी देश की महिला हों आपको हिजाब पहनना ही होगा। एशियन नेशंस कप चैंपियनशिप में भी खिलाड़ियों के लिए हिजाब पहनना ज़रुरी रखा गया है।

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जयपुर। ईरान, एक ऐसा मुस्लिम देश, जहां हर किसी महिला को हिजाब पहनना ज़रुरी है। हिजाब का मतलब है कि किसी भी महिला का चेहरे तक को ढंक कर रखने के लिए एक कपड़ा पहनना। आमतौर पर मुस्लिम समाज की औरतें, लड़कियां हिजाब पहना करती हैं।

ईरान में इस साल के जुलाई में शतरंज की एशियन नेशंस कप चैंपियनशिप होने वाली है। इस चैंपियनशिप में भारत की तरफ से शतरंज की बेहतरीन खिलाड़ी सौम्या स्वामीनाथन भाग लेने वाली थीं। सौम्या के नाम कई चैंपियनशिप का खिताब है, इसके अलावा वो शतरंज का ग्रैंड स्लैम भी जीत चुकी हैं।

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लेकिन सौम्या मे ईरान में होने जा रही एशियन नेशंस कप चैंपियनशिप में हिस्सा लेने से मना कर दिया है। उन्होंने जो वजह बताई है, वो उनके इस फैसले को सही साबित करती हुई दिख रही है।

ईरान में सिर्फ ईरानी ही नहीं बल्कि ईरान में आईं बाहरी देशों की महिलाओं को भी हिजाब पहनना फर्ज़ है। मतलब कि आप किसी भी देश की महिला हों आपको हिजाब पहनना ही होगा। एशियन नेशंस कप चैंपियनशिप में भी खिलाड़ियों के लिए हिजाब पहनना ज़रुरी रखा गया है।

इस नियम के पालन के बिना चैंपियनशिप में हिस्सा नहीं लिया जा सकता है, जिसका अब सौम्या स्वामीनाथन ने विरोध किया है और ईरान जा कर खेलने से मना कर दिया है। 9 जून को सौम्या ने इस बारे में फेसबुक पर लिखा, जिसका ट्रांस्लेशन कुछ इस तरह से है..

ये बताते हुए मुझे दुख हो रहा है कि मैंने आने वाली एशियन नेशंस कप चैंपियनशिप से अपना नाम वापस लेने की गुज़ारिश की है। क्योंकि मैं नहीं चाहती कि मुझे हिजाब या बुरखा पहनने पर मजबूर किया जाए। सबके लिए हिजाब की पाबंदी वाला ईरानी क़ानून मुझे मेरे बुनियादी मानवाधिकारों का सीधा हनन लगता है।

ऐसी प्रतियोगिताएं आयोजित करते वक़्त खिलाड़ियों के अधिकारों का ध्यान न रखा जाना निराशाजनक है। ये मैं समझ सकती हूं कि आयोजक हमसे अपनी नेशनल टीम की ड्रेस या फॉर्मल कपड़े पहनने की उम्मीद करें लेकिन धार्मिक ड्रेस कोड की स्पोर्ट्स में यकीनन कोई जगह नहीं है।

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सौम्या ने जो किया है वो कोई हौसले के साथ चलने वाली महिला ही कर सकती है। ऐसा फैसला लेना, मतलब कि सीधा ईरान के कानून से टकराना और उसको अपने अंदाज़ में जवाब देना। उन्होंने जो फेसबुक वॉल पर लिखा है, उसमें सच्चाई है कि सीधे सीधे आप अपने देश के कानून को किसी पर भी थोप नहीं सकते हैं।

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इसके अलावा ईरान को भी शायद ये जवाब मिल गया हो कि जिस तरह के तानाशाही कानून को उसने अपने देश में लागू कर रखा है, वो सिर्फ उसके देश ही नहीं बल्कि हर किसी के लिए खतरनाक ही है। सौम्या ने अपने जवाब से ये साफ संदेश दे दिया है कि उनके लिए चैंपियनशिप महत्व रखता है, लेकिन इसके लिए वो कोई समझौता नहीं कर सकती हैं।

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