पीकेएल-7 : दबंग दिल्ली ने तेलुगू टाइटन्स को 37-29 से हराया

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प्रो कबड्डी लीग (पीकेएल) के सीजन सात में तूफानी प्रदर्शन कर रही दबंग दिल्ली ने सोमवार को खेले गए लीग के एक मुकाबले में तेलुगू टाइटंइस को 37-29 से हरा दिया। पीकेएल के इतिहास में दिल्ली की तेलुगू पर 12 मैचों में यह तीसरी जीत है, जबकि इस सीजन में दिल्ली की तेलुगू पर लगातार दूसरी जीत है।

इस जीत के बाद दिल्ली अब अंक तालिका में 16 मैचों में 69 अंकों के साथ पहले स्थान पर कायम है, जबकि तेलुगू टाइटन्स इस हार के बाद भी 11वें स्थान पर बरकरार है।

यहां श्री शिव छत्रपति स्पोर्ट्स कॉम्पलेक्स में खेले गए मुकाबले में दबंग दिल्ली के जीत के हीरो रहे नवीन कुमार ने एक बार फिर सुपर-10 लगाया और 12 रेड प्वाइंट्स लिए। उन्होंने अपने ही रिकॉर्ड को और आगे बढ़ाते हुए इस सीजन का 15वां और लगातार 14वां सुपर-10 हासिल किया।

तेलुगू की ओर से सिद्धार्त देसाई ने भी सुपर-10 पूरा किया और कुल 12 रेड प्वाइंट्स लिए।

पहले हाफ के खत्म होने से ठीक पहले दबंग दिल्ली ने तेलुगू को ऑल आउट करते हुए हाफ टाइम तक 18-15 की बढ़त ले ली थी।

दूसरे हाफ में दिल्ली ने बेहतरीन खेल दिखाया और 31वें मिनट में 11 अंकों की बढ़त बना ली। इसके बाद व्हिसल बजते ही दबंग दिल्ली ने तेलुगू को 37-29 से शिकस्त दे दी।

न्यूज सत्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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